Wednesday, 2 September 2020

Happy New Year essay in Hindi 2021 | नव वर्ष पर निबंध

New Year essay in Hindi 2021 - देश में जिस प्रकार विभिन्न त्यौहार बड़ी धूमधाम, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं, वैसा ही उत्साह लोगों में नववर्ष के अवसर पर भी देखा जाता है। नव वर्ष के प्रथम दिन लोग एक-दूसरे को नव वर्ष की बधाई देते हैं और स्वयं के लिए भी कामना करते हैं कि नया साल शुभ एवं फलदायक हो, नए साल में सफलता उनके कदम चूमे तथा नव वर्ष उनके जीवन को खुशियों से महका दे। नए साल के आगमन की खुशी में लोग नव वर्ष की पूर्व संध्या पर नाचते-गाते हैं और खुशियां मनाते हैं।

नाच-गाने का यह सिलसिला घड़ी में रात्रि के 12 बजने अर्थात् नव वर्ष के आरंभ होने तक चलता है और घड़ी की सुइयों द्वारा जैसे ही 12 बजने का संकेत मिलता है अर्थात नया साल दस्तक देता है, चहुं ओर आतिशबाजियों का धूमधड़ाका शुरू हो जाता है। परंतु क्या आप दुनिया भर के देशों में नववर्ष से जुड़ी विभिन्न परम्पराओं के बारे में जानते हैं। अगर नहीं तो यहां आपको इसके बारे में ही बता रहे हैं।
New Year essay in Hindi
How to celebrate new year in world - 

डेनमार्क में अपने किसी मित्र के घर के दरवाजे पर जाकर प्लेटें तोड़ना शुभ माना जाता है। इस दिन लोग कुसी पर चढ़कर छलांग भी लगाते हैं।

ग्रीस में नववर्ष के अवसर पर मुख्य द्वार पर प्याज टांगा जाता है। इसे नव जन्म का प्रतीक मानते हैं। वहां नव वर्ष की सुबह माता-पिता अपने बच्चों के सिर पर प्याज छुआ कर उन्हें जगाते हैं। बैल्जियम में इस दिन अपने पालतू जानवरों के प्रति प्यार जताया जाता है। बोलिविया में सिक्के को मिठाइयों में मिला दिया जाता है और जो कोई इसको बाद में तलाश कर लेता है माना जाता है कि साल अच्छा बीतेगा। फ्रांस में इस दिन घर में ही केक बनाकर खाने की परम्परा है। कोलम्बिया में लोग बेहतर भविष्य के लिए अपने साथ सूटकेस लेकर घूमते हैं। इसके पीछे उनकी मान्यता है कि ऐसा करने पर वे पूरे वर्ष मजे से घूमते रहेंगे। थाइलैंड में नए साल के अवसर पर लोग एक-दूसरे पर पानी और पाऊडर फेंकते हैं।

चिली में परिवार के लोग रात में कब्रिस्तान में अपने किसी बेहद करीबी और प्यारे की कब्र के साथ लिपट कर सोते हैं। रोमानिया में किसान अपनी गाय से बात करने की कोशिश करते हैं। यदि वे इसमें सफल हो जाते हैं तो माना जाता है कि उनके लिए वह साल अच्छा होगा। आयरलैंड में इस दिन दीवार पर ब्रैड फैंकी जाती है। माना जाता है कि ऐसा करके बुराइयों को अपने से दूर किया जाता है। दक्षिण अफ्रीका में कुछ जगहों पर इस खास मौके पर इक्वाडोर में नव वर्ष पर काकभगौड़े को गुजरे वर्ष की नकारात्मकता के प्रतीक के रूप में जलाने की परम्परा है।

स्पेन में नववर्ष की रात 12 बजने पर घड़ी की हर घंटी के साथ 12 अंगूर खाने की परम्परा है। इनमें से हर एक अंगूर साल के एक महीने में 'गुड लक' का प्रतीक होता है। मैड्रिड तथा बार्सीलोना जैसे शहरों में लोग एक साथ मिल कर अंगूर खाने के लिए प्रमुख चौकों तथा स्थानों पर जमा होते हैं।

फर्नीचर को खिड़की से बाहर फैंका जाता है। साइबेरिया में नए साल के मौके पर बर्फ के पानी में लकड़ी के संदूक के साथ छलांग लगाने की परम्परा है। फिनलैंड में नववर्ष के अवसर पर टिन पिघलाकर एक बर्तन में डाला जाता है और उसके बाद जो आकार बनता है उसके अनुसार भविष्यवाणी की जाती है।

पनामा में नववर्ष के अवसर पर भाग्योदय के लिए पुतला जलाने की परम्परा है। स्कॉटलैंड में नववर्ष के दिन जो भी घर के बाहर जाता है उसके सफल और सुखद भविष्य के लिए गिफ्ट दिया जाता है। एस्तोनिया में नव वर्ष के आगमन पर पारम्परिक भोजन खाने की परम्परा है। इस खास अवसर पर पूरे दिन में करीब 7 बार यहां के लोग खाना खाते हैं। ब्राजील सहित मध्य तथा दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर, बोलिविया, वेनेजुएला आदि देशों में नव वर्ष के अवसर पर स्पैशल अंडरवियर पहनने की परम्परा है। इनके लिए सबसे लोकप्रिय लाल रंग के अंडरवियर हैं जिन्हें माना जाता है कि नव वर्ष में ये प्रेम बढ़ाने का काम करते हैं जबकि पीले रंग वाले जीवन में धन लाते हैं।

नव वर्ष का इतिहास - 
आज लगभग सारी दुनिया 1 जनवरी को ही नव वर्ष मनाती है परंतु करीब 4000 वर्ष पहले बेबीलोन में नया वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता था जो वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी। तब रोम के तानाशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में | जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। तब से आज तक ईसाई धर्म के लोग इसी दिन नया साल मनाते हैं जो अब दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रचलित नव वर्ष बन चुका है।

भारत में विभिन्न नव वर्ष- 
 दुनिया भर में विभिन्न धर्मों के लोग अलग-अलग दिन नव वर्ष भी मनाते हैं। भारत की बात करें तो हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है जिसे हिन्दू नव सम्वत्सर या नव संवत कहते हैं। इसी दिन से विक्रमी सम्वत के नए साल का आरंभ भी होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि अप्रैल में आती है। इसे गुड़ी पड़वा, उगादी आदि नामों से भारत के अनेक क्षेत्रों में मनाया जाता है।
भारत में ही जैन नव वर्ष दीपावली से अगले दिन शुरू होता है। मान्यता के अनुसार भगवान महावीर स्वामी को दीपावली के दिन ही मोक्ष प्राप्ति हुई थी। इसके अगले दिन ही जैन धर्म के अनुयायी नया साल मनाते हैं। इसे वीर निर्वाण संवत कहते हैं।

गुजरात में भी नए साल का आरंभ दीपावली के दूसरे दिन से ही माना जाता है। व्यापारी भी इसी दिन से नए साल की शुरूआत मानते हैं।

इस्लामी कैलेंडर के अनुसार मोहर्रम महीने की पहली तारीख को मुस्लिम समाज का नया साल हिजरी शुरू होता है। इस्लामी या हिजरी कैलेंडर चंद्र आधारित सिंधी नववर्ष चेटीचंड उत्सव से शुरू होता है जो चैत्र शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। सिंधी मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ था जो वरुण देव के अवतार थे।

पंजाब में नया साल बैसाखी पर्व के रूप में मनाया जाता है जो अप्रैल में आता है। सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार, होला मोहल्ला (होली के दूसरे दिन) नया साल होता है।

पारसी धर्म का नया साल नवरोज के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर 19 अगस्त को नवरोज का उत्सव पारसी लोग मनाते हैं। लगभग 3000 वर्ष पूर्व शाह जमशेदजी ने पारसी धर्म में नवरोज मनाने की शुरूआत की। नव अर्थात् नया और रोज यानि दिन .

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