Tuesday, 1 September 2020

Banyan Tree Information in Hindi बरगद का पेड़

Banyan Tree Information in Hindi (Bargad Ka Ped Essay)

Banyan Tree Information in Hindi

बरगद भारत का महत्वपूर्ण पेड़ है। यह भारत में पाए जाने वाले पेड़ों में सबसे अधिक बड़ा और फैलाव वाला पेड़ है। यह वृक्ष ज्यादातर गर्म देशों में पाया जाता है। इस पेड़ को बहुत ही पवित्र पेड़ माना जाता है और ऐसी मान्यता है के बरगद के पेड़ पर देवी -देवता निवास करते हैं इसीलिए यह हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इस धर्म के लोग बरगद के पेड़ की पूजा करते हैं। माना जाता है के इस पेड़ में ब्रह्मा और विष्णु निवास करते हैं इस पेड़ के नीचे व्रत कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं माना जाता है भगवान बुद्ध को भी इस वृक्ष नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी बरगद का पेड़ आकार में बहुत बड़ा विशालकाय पेड़ होता है। इस पेड़ पर टाहनीयों से लटकती हुई लम्बी जड़ें इसे बड़ा और आकर्षित बनाती हैं। यह पेड़ गर्मी के मौसम में ठंडक देता है और वहीँ सर्दियों के मौसम में इसके नीचे गर्मी बनी रहती है।

बरगद के पेड़ को पवित्र पेड़ माना जाता है इसीलिए इसे काटना पाप समझा जाता है। इस पेड़ को वट के नाम से भी जाना जाता है। बरगद के पेड़ की उम्र हजारों सालों तक होती है। बरगद का पेड़ बहुत ही घना पेड़ होता है जो ज्यादातर हरी पत्तियों और तनों से घिरा होता है। इस पेड़ की पत्तियां अंडाकार होती हैं। इस पेड़ की किसी टाहनी जा पत्ती को तोड़ने से इसमें दूध जैसा तरल पदार्थ निकलने लगता है जिसे लेटेक्स कहा जाता है। इसके इलावा बरगद के पेड़ की पत्तियां और फ़ल से कई प्रकार की दवाईयां बनाई जाती हैं। बरगद के पेड़ के तने बहुत मजबूत होते हैं जितना पुराना बरगद का पेड़ होगा उतने ही ज्यादा बड़े इसके तने होंगे। पुराने समयों में मुनि -ऋषि बच्चों को ज्ञान बरगद के पेड़ के नीचे ही देते थे।

बरगद का वृक्ष मोरासी परिवार का वृक्ष है इसे अंग्रेजी भाषा में Banyan Tree कहा जाता है। इस पेड़ को बहुत सारे नामों से पुकारा जाता है जैसे बट , बड अदि। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला पेड़ है। यह भारत के इलावा बंगलादेश और पाकिस्तान में भी पाया जाता है। यह भारत में सभी जगहों पर पाया जाता है।
बरगद का वृक्ष घनी छाया वाला वृक्ष है यह पेड़ लगभग 20 से 30 मीटर तक ऊचा होता है इसका तना उपर उठकर अनेक शाखाओं में बंट जाता है और शाखाएं पेड़ के चारो तरफ़ फ़ैल जाती हैं छोटे वृक्ष का तना गोल और शखाएं चिकनी होती हैं। तथा पुराने वृक्ष की शखाएं और तने खुरदरे होते हैं। तने लम्बे चौड़े जटाओं के सामान होते हैं। इस पेड़ के तने और शाखाओं की छाल दुसरे पेड़ों के अपेक्षा ज्यादा मोटी होती है।

इस पेड़ की शाखाओं से जटाएं निकलती हैं शुरू में यह पतली होती हैं और नीचे की तरफ़ यह झूलती रहती हैं समय के साथ यह जमीन को छूने लगती हैं। पेड़ के पत्ते अंडाकार होते हैं पत्ते काफी मोटे होते हैं और एक मजबूत ठंडल द्वारा डाल से जुड़े होते हैं। बरगद के पत्ते एक तरफ़ से चिकने होते हैं और रंग गहरा हरा होता है। जब नए पत्ते निकलते हैं तो यह लाल रंग से शुरू होते हैं और धीरे धीरे यह हरे रंग के हो जाते हैं।

बरगद के वृक्ष पर गर्मियों के मौसम में फ़ल आते हैं फ़रवरी से मई तक फल आने शुरू हो जाते हैं यह फ़ल छोटे और गोल होते हैं ज्यादातर फ़ल जोड़ों में निकलते हैं फ़ल पक जाने पर इसका रंग हरे से लाल हो जाता है। कुछ पेड़ों पर पीले पीले और लाल रंग लिए फ़ल लगते हैं। इन फलों को पक्षी जैसे कोयल , तोता बड़े चाव से खाते हैं।
बरगद का वृक्ष (Banyan Tree) बड़ा ही फायदेमंद वृक्ष है इसके पत्ते , छाल , टहनियों से निकलने वाला दूध और फ़ल बड़े ही उपयोगी होते हैं जिनसे कई प्रकार की औषधीय दवाईयां तैयार की जाती हैं। बरगद अंकुरों से कई प्रकार की घावों की औषधीय बनाई जाती है। इसके इलावा कोंपलों और पत्तों से फोड़े की चिकित्सा तैयार की जाती है।

बरगद की छाल बड़ी ही उपयोगी मानी जाती है इसकी छाल से गर्भधारण करने की क्षमता का विकास करने का गुण होता है। इसकी जटाएं भी बड़ी उपयोगी होती हैं जटाओं की सहायता से बाँझ औरत को संतान प्रदान करने और गठिया के रोगियों के लिए औषधीय बनायी जाती है। बरगद से निकलने वाले दूध से बावासीर के रोगियों के लिए औषधीय तैयार की जाती हैं।

बरगद के तने और शाखाओं की लकड़ी पानी में लम्बे समय तक ख़राब नहीं होती इसकी लकड़ी से कई प्रकार की वस्तुएं बनायीं जाती हैं। परन्तु इससे बनाई गयी वस्तुयों की मांग कम है।

बरगद का पेड़ (Banyan Tree) हमें शुद्ध हवा प्रदान करता है यह हमें भरपूर मात्रा में आक्सीजन देता है बरगद का पेड़ 20 घंटों से भी ज्यादा समय तक आक्सीजन छोड़ता है और अशुद्ध हवा को खींचता रहता है । इसीलिए बरगद का वृक्ष विशाल होने के साथ -साथ गुणों के साथ भरपूर वृक्ष है।
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Short Essay on Banyan Tree - 350 words

बरगद भारत का राष्ट्रीय पेड़ है। यह पेड़ ज्यादातर गर्म देशों में पाया जाता है। ऐसी मान्यता भी है के बरगद के पेड़ पर देवी -देवता निवास करते हैं इसीलिए यह हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इस धर्म के लोग बरगद के पेड़ की पूजा करते हैं। इसी वजय से इस पेड़ को पवित्रता की निशानी माना जाता है।

बरगद का वृक्ष आकार में बहुत विशालकाय पेड़ होता है। इस पेड़ पर टाहनीयों से लटकती हुई लम्बी जड़ें इसे बड़ा और आकर्षित बनाती हैं। गर्मी के मौसम में इसके नीचे ठंडक बनी रहती है और वहीँ सर्दियों के मौसम में इसके नीचे गर्मी बनी रहती है।

बरगद के पेड़ को वट के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ की उम्र हजारों सालों तक होती है यह पेड़ बहुत ही घना पेड़ होता है जो ज्यादातर हरी पत्तियों और तनों से घिरा होता है इस पेड़ की पत्तियां अंडाकार होती हैं। इस के तने बहुत मजबूत होते हैं जितना पुराना बरगद का पेड़ होगा उतने ही ज्यादा बड़े तने होंगे।

यह वृक्ष घनी छाया वाला वृक्ष है यह लगभग 20 से 30 मीटर तक ऊचा होता है इसका तना उपर उठकर अनेक शाखाओं में बंट जाता है और शाखाएं पेड़ के चारो तरफ़ होती हैं छोटे पेड़ का तना गोल और शखाएं चिकनी होती हैं। इस पेड़ की शाखाओं से जटाएं निकलती हैं शुरू में यह पतली होती हैं और नीचे की तरफ़ यह झूलती रहती हैं।

इस पेड़ पर गर्मियों के मौसम में फ़ल आते हैं फ़रवरी से मई तक फल आने शुरू हो जाते हैं यह फ़ल छोटे और गोल होते हैं ज्यादातर फ़ल जोड़ों में निकलते हैं फ़ल पक जाने पर इसका रंग हरे से लाल हो जाता है।
बरगद का वृक्ष बड़ा ही फायदेमंद वृक्ष है इसके पत्ते , छाल , टहनियों से निकलने वाला दूध और फ़ल बड़े ही उपयोगी होते हैं जिनसे कई प्रकार की औषधीय दवाईयां तैयार की जाती हैं।

यह वृक्ष हमें शुद्ध हवा देता है जिससे हमें आक्सीजन मिलती है बरगद का पेड़ 20 घंटों से भी अधिक समय तक आक्सीजन छोड़ता रहता है और अशुद्ध हवा को खींचता रहता है।


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