Wednesday, 2 September 2020

Chandra Shekhar Azad Essay in Hindi स्वतंत्रता सेनानी चन्द्र शेखर आजाद पर निबंध

Chandra Shekhar Azad Essay in Hindi : Swatantrata Senani par Nibandh

Chandra Shekhar Azad Essay in Hindi

आजादी के नाम पर मर मिटने वाले चन्द्रशेखर आजाद को भला कौन नहीं जानता जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 मैं  हुआ आपके पिताजी का नाम सीताराम तिवारी था और आप की माता जी का नाम जगरानी देवी था।

आजाद का बचपन आदिवासी इलाके में गुजरा और वह भील बालकों के साथ रहते हुए एक अच्छा धनुष वान चलाना सीख गए थे इसीलिए वह बचपन में एक अच्छे निशानेबाज बन गए थे।

चंद्रशेखर आजाद की मात्र 14 साल की आयु में गांधी जी के असहयोग आन्दोलन से जुड़ गए थे और इस आन्दोलन के चलते आपको गिरफ़्तार कर लिया गया जब जज ने आपसे आपके पिता का नाम पूछा तो चन्द्रशेखर ने अपना नाम आजाद पिता का नाम स्वतंत्रता और माता का नाम जेल बताया तभी से आपका नाम चंद्रशेखर आजाद पड़ा ।

27 फ़रवरी 1931 पुलिस ने चंद्रशेखर आजाद को इलाहबाद में घेर लिया और चारों तरफ से गोलियां चलनी शुरू हो गयी चंद्रशेखर आजाद ने काफी समय तक पुलिस का सामना किया किन्तु चंद्रशेखर ने कसम ली थी के वो कभी भी जिन्दा पुलिस के हाथ नहीं लगेगा अंत जब उनके पास एक गोली बची इसीलिए इन्होने खुद को गोली मार ली थी।

Swantantrata Senani Essay in Hindi - 200 words

देश के लिए अपना जीवन कुर्बान कर देने वाले चन्द्रशेखर आजाद को भला कौन नहीं जानता जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 मैं  हुआ आपके पिताजी का नाम सीताराम तिवारी था और माता जी का नाम जगरानी देवी था।

शेखर का बचपन आदिवासी इलाके में गुजरा और वह भील बालकों के साथ रहते हुए एक अच्छा धनुष वान चलाना सीख गया था इसीलिए वह बचपन में एक अच्छे निशानेबाज बन गए थे।
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चंद्रशेखर आजाद की मात्र 14 साल की आयु में गांधी जी के असहयोग आन्दोलन से जुड़ गए थे और इस आन्दोलन के चलते आपको गिरफ़्तार कर लिया गया जब जज ने आपसे आपके पिता का नाम पूछा तो चन्द्रशेखर ने अपना नाम आजाद पिता का नाम स्वतंत्रता और माता का नाम जेल बताया तभी से आपका नाम चंद्रशेखर आजाद पड़ा ।

27 फ़रवरी 1931 पुलिस ने चंद्रशेखर आजाद को इलाहबाद में घेर लिया और चारों तरफ से गोलियां चलनी शुरू हो गयी चंद्रशेखर आजाद ने काफी समय तक पुलिस का सामना किया किन्तु चंद्रशेखर ने कसम ली थी के वो कभी भी जिन्दा पुलिस के हाथ नहीं लगेगा अंत जब उनके पास एक गोली बची इसीलिए इन्होने खुद को गोली मार ली थी। .

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