Wednesday, 2 September 2020

Essay on Baisakhi in Hindi बैसाखी पर निबंध

Essay on Baisakhi in Hindi बैसाखी पर निबंध

यह त्योहार सिख धर्म के लोगों का त्योहार है। भारतीय मास परंपरा में बैसाख महीने के पहला दिन बैसाखी के रूप में मनाया जाता है।  वैसाखी का त्यौहार हर वर्ष 13 अप्रैल को मनाया जाता है। इसे हिन्दुओं के नवबर्ष का पहला दिन माना जाता है।

वैसाखी का यह पवित्र त्योहार पहले पूरे उतरी भारत में मनाया जाता है परन्तु सन 1919 ई: के जिलियांवाला बाग़ के हत्याकांड के बाद यह पूरे सम्पूर्ण भारत में मनाया जाने लगा। पंजाब में इस त्योहार का बहुत ज्यादा महत्व है इसको यहां बड़ी ही धूम -धाम से मनाया जाता है इस दिन ही सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी उन्होंने पांच प्यारों को अमृत छकाया और बाद में खुद उनसे अमृत छका। इसके इलावा वहीँ इसका सबंध किसानों से भी जोड़ा जाता है वैसाखी वाले दिन किसान अपनी गेहूं की फ़सल की कटाई शुरू करते हैं।
Essay on Baisakhi in Hindi
बैसाखी (Baisakhi) के दिन विशेष प्रकार के उत्सव मनाए जाते हैं इस दिन सरोवरों में स्नान किया जाता है पंजाब में लोग इस पवित्र दिन के मौके पर ढ़ोल पर भांगड़ा करते हैं।

बैसाखी के दिन सूरज मेष राशि में सक्रमण करता है जिस कारण इस दिन को मेष संक्राति भी कहते हैं।
इन सब इतिहासिक बातों को याद कर किसका ह्रदय नहीं झूम उठेगा वैसाखी का त्योहार हमें प्रेम की भावना में रहना सिखाता है इस प्रकार यह त्योहार वैसाख का नववर्ष और अत्याचारों के विरोद्ध का त्योहार है वह सदैव हमें शांति , अहिंसा , एवं मानवता का पाठ पढ़ाता है
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Baisakhi (essay) Paragraph in Hindi  - 2

बैसाखी का त्यौहार अनेक परंपराओं तथा हक सच की बुनियाद अपनी विलक्षणता का परिचय देता है। इस त्यौहार को फसलों का त्यौहार भी माना जाता है। सूर्य के हिसाब से वैसाख का प्रथम दिन। गुरु दर्शनों के लिए बैसाखी वाले दिन देश -विदेश से श्रद्धालु श्री आनंदपुर साहिब आते हैं। पंजाबियों ने शहीदी एवं कुर्बानी की बुनियाद पर तरकी की है।

बैसाखी का त्यौहार जुल्म का नाश करने और सच्चाई तथा मानवता की विजय का प्रतीक है। आज का दिन भारत के इतिहास में चमकते सूर्य की भांति सदैव जाना जाता रहेगा। आज के दिन ही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 को तख्त श्री केसगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब में पांच इलाही अमृत वाणियों का पाठ करके 'खंडे -बाटे ' का अमृत तैयार किया तथा अलग अलग धर्मों , जातियों एवं क्षेत्रों के सिर देने वाले 'पांच प्यारों' को 'सिंह' सजाकर 'खालसा अकाल पुरुख की फ़ौज' की साजना की।

यह फ़ौज जुल्म के ख़िलाफ़ मुकाबला करने के लिए तैयार की गयी थी। बादशाह दरवेश गुरु गोबिंद सिंह जी ने फिर स्वंय भी पांच सिंह साहिबानों से 'अमृत बाटे' की दात प्राप्त करके उनको मानवता तथा खालस मानव के सृजनहार बना दिया तथा बहुत ही उच्कोटि की वाणी में कहा 'खालसा मेरो सतगुरु पूरा। खालसा मेरो साजन सूरा।। खालसा मेरा पिंड परान। खालसा मेरी जान की जान। खालसा मेरो रूप है ख़ास खालसे में हौं करो निवास।
उन्होंने खालसा को अपनी जिंदजान अपना सब कुछ कहा है। उन्होंने कौम में एक नई क्रांतिकारी शक्ति का समावेश किया। अकाल पुरुख की खालसा फ़ौज प्यारों के नाम थे : भाई दया सिंह, भाई धर्म सिंह, भाई हिम्मत सिंह भाई साहिब सिंह, भाई मोहकम सिंह। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने धर्म निरपेक्षता, लोकराज , समानता, समाजवाद के साथ चलने का उपदेश दिया।

बैसाखी का त्योहार सारे भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी धूम धाम एवं श्रद्धा से मनाया जाता है। विदेशों में जो पंजाबी रहते हैं, वे भी इस त्योहार को बड़े स्तर पर मेले के रूप में हर्ष, उमंग तथा श्रद्धाभाव से सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं।

माटी अर्थात धरती माता का भी त्योहार है बैसाखी। पंजाब कृषि प्रधान प्रांत है। बैसाखी का त्योहार किसान, जिमींदार, ढोल - ढमाके, भांगड़े, गिद्दे तथा रिश्तों की मिठास से मनाते हैं। इस दिन तक फसलें पककर तैयार हो जाती हैं। सोने की चमक जैसे गेंहूं की फ़सल पककर अपने भव्य यौवन की दास्ताँ कहती हुई किसानों, मजदूरों को मालामाल करती है। फसलें हंसती हुई झूमती हैं तथा तरक्की का संदेश देती हैं।

फूल अपनी सुरभि से फिजा में जन्नत उतार लाते हैं। आम के वृक्षों पर पड़ा भरपूर फल ख़ुशहाली का भविष्य परिचायक फूल किसी सजी संवरी दुल्हन की तरह लगते हैं। चारों ओर बहारों का जमघट नज़र आता है। घरों में परंपरावादी तथा आधुनिक पकवान मिष्ठान बनाये जाते हैं। मेहमानों की आमद रिश्तों में शहद जैसी मिठास घोलती है।

गुरुद्वारों में संगत ही संगत, दूर दूर तक कीरतन का अध्यात्मिक आनंद रूह तक सुकून भर देता है। जूतों की सेवा का अथाह श्रद्धा भाव गुरुओं का आशीर्वाद तथा सम्पूर्ण ह्रदयों की गरिमा को बढाता है बैसाखी का त्योहार। बैसाखी का त्योहार मानवता के लिए महान पवित्र स्थान सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर में अन्तराष्ट्रीय स्तर पर धूमधाम तथा श्रद्धा से मनाया जाता है।

सारे दरवार साहिब में की गयी दीपमाला सृष्टि की सुषमा में दिव्यता का स्वरूप बनती नजर आती है। बैसाखी गंगा सागर बंगाल में भी मनाई जाती है। हहिमाचल प्रदेश के लगभग सभी मन्दिरों में बैसाखी का मेला मनाया जाता है। इस दिन सूर्य उच्च राशि में प्रवेश करता है, जो शुभ माना जाता है। बैसाख मॉस के शुभांरभ वाले इस दिन का बड़ा महत्व होता है क्योंकि प्रकृति का चारों ओर आनंद बिखरा होता है। आओ आज सब मिलकर आजे के दिन ख़ालसा शुद्ध मानव बनने की कोशिश करें, तथा रिश्वत, बेईमानी, धोखे फरेब को छोड़कर सच को अपनाएं।

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