Thursday, 3 September 2020

पिता पर निबंध - Essay on Father in Hindi

पिता पर निबंध - Essay on Father in Hindi 

दो अक्षरों के मेल से बना छोटा-सा शब्द 'पिता' स्वयं में व्याप्त सम्पूर्णता के बावजूद कभी परिभाषित नहीं किया जा सकता क्योंकि पिता को किसी परिभाषा में नहीं बांधा जा सकता। तभी तो किसी ने सही कहा है: घर की चारदीवारी में पूरा जहान होता है, मां होती है जमी, पिता आसमान होता है।

 Essay on Father in Hindi



पिता अमीर हो या गरीब, औलाद के लिएशहंशाह होता है। इंसान अपने जीवन में पिता के योगदान को कभी नकार नहीं सकता क्योंकि वह उनके नाम से ही समाज में जाना जाता है। पिता एक सुरक्षा कवच के रूप में हर पल उसके साथ रहते हैं और हर आवश्यकता को पूरा करने का भरपूर प्रयत्न करते हैं। सही मायनों में पिता हमारे पालनहार होते हैं। उंगली पकड़ कर कदम आगे बढ़ाने और जीवन में आने वाले उतार-चडावसे परिचित कराते वह हम से यह आशा रखते हैं कि हम अच्छे संस्कारों और बेहतर शिक्षा के साथ उनका नाम रोशन करें और उनसे एक कदम आगे बढ़कर और अधिक कामयाब बनें।

हम से बेतहाशा स्नेह रखने के साथ साथ उन्हें हमारी बेहतरी के लिए कभीकभी कठोर निर्णय भी लेने पड़ते हैं ताकि हम जीवन में कभी भी भटकें नहीं। कोई भी पिता यह नहीं चाहता कि कोई उसकी संतान के बारे में कुछ गलत कहे। अपने जीवन के अनुभवों से परिचित वह नहीं चाहते कि जो संघर्ष व परेशानियां उन्होंने अपने जीवन में देखी हैं वैसा मौका उनकी संतान की जिंदगी में भी कभी आए। अपनी संतान को समाज में श्रेष्ठ बनाने के लिए हर तरह की चुनौतियां का वे सिर्फ इसलिए मुकाबला करते हैं ताकि उनके सपनों को पूरा कर सकें। पिता के इसी प्यार और कुर्बानी के फलस्वरूप उन्हें धन्यवाद देने के लिए फादर्स डे मनाया जाता है। फादर्स-डे की शुरूआत के संदर्भ में प्रचलित है कि अमरीकाके वैस्ट वजीर्निया में 5 जुलाई 1908 में उन सभी पिताओं को जिन्होंने एक भयानक खान विस्फोट में अपनी जान गंवाई थी, सम्मान देने के लिए इस दिन की शुरूआत की गई।

 एक अन्य जानकारी के अनुसार वाशिंगटन में सोनोरा स्मार्ट डाड ने फादर्स डे मनाने का निश्चय किया। उसने सोचा कि अगर मदर्सडे मनाया जाता है तोफादर्स डे क्यों नहीं। पिता भीतो सम्मान और प्रशंसा के हकदार हैं। उसकी मां की मृत्यु के बाद जिस प्रकार उसके किसान पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट ने सभी बच्चों को प्यार से पाला और बड़ा किया तो सोनोरा के दिमाग में यह विचार आया कि एक दिन ऐसा भी हो जो पिताओं के प्रति समर्पित हो।सबसे पहले यह दिन 19 जुन 1910 में वाशिंगटन में मनाया गया लेकिन आधिकारिक मान्यता इसे 1972 में मिली। आज पूरे विश्व में यह दिन जून महीने के तीसरे रविवार को मनाने की परम्परा है।

पिता परिवार के लिए सुरक्षा कवच की तरह हैं व बच्चों के लिए वह एक दोस्त से लेकर भगवान तक होते हैं। उनका नाम आते ही हमारा सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। वह एक ऐसे वटवृक्ष के समान होते हैं जिनके आश्रम में हम फलीभूत होते हैं। वह हमारी प्रेरणा, हमारे मार्गदर्शन के एकमात्र स्रोत हैं।

Nice Lines on father in Hindi - दोहे पिता पर

बरसों बीते पर मुझे, ऐसा लगता तात।
साया एक अदृश्य सा, चलता मेरे साथ।

बिना मजूरी लौटते, बापूजब थक-हार।
लेकर आते पांव में, सौ-सौ मन का भार।

जीवन भर पीते रहे, बापू मन की पीर।
न होठों पर शब्द थे, न नैनों में नीर।।

माता सुंदर दृश्य है, जो मंचित हर ओर।
बापू हैं नेपथ्य में, जिनके हाथों डोर ।।

बापू ने समझा दिया, था जितना सामर्थ्य
फिर बोले खुद ढूंढना, इस जीवन के अर्थ ।।

देते थे हर बात पर बापू ताना मार।
मेरे ही हक में रहा उनका ये व्यवहार।

बापू बच्चों के लिए, होते हैं कुछ खास।
उनके कांधे बैठकर, दिखता है आकाश।

जिन्दा थे जब तक पिता, सोच रही बेमेल।
दर्पण कहता हू-ब-हू,शक्लें खाती मेल।।

मझे उठा कर गोद में, पिता गए उस धाम।
जिनके आशीर्वाद से, मिला पिता का नाम।।

चढ़ती भौंहें तात की, बतला देती राज।
वो कितने प्रसन्न हैं, वो कितने नाराज।।

आंख पिता के मूंदते, यूं बदले हालात।
भाई भी करते नहीं, अब आपस में बात ।।
-डा. गोपाल राजगोपाल

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