Wednesday, 2 September 2020

हिंदी दिवस पर निबंध Essay on Hindi Diwas

हिंदी दिवस पर निबंध : Hindi Diwas par Nibandh

हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी भारत की राष्ट्रीय भाषा है। 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारत की राष्ट्र भाषा होने का गौरव प्राप्त  हुआ क्योंकि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो पूरे देश को एकता के धागे में बांधती है।

यह दिवस सम्पूर्ण भारत में हिंदी भाषा के महत्व को समझने के लिए मनाया जाता है। इस दिन हिंदी भाषा से सबंधित बहुत सारे प्रोग्राम करवाए जाते हैं जिसमें हिंदी भाषा में भाषण , लेख , कहानी और कवितायो के द्वारा हिंदी के महत्व को समझाया जाता है।

Essay on Hindi Diwas


हिंदी भाषा की सबसे अच्छी बात ये है के किसी भी शब्द को हम वैसे ही लिखते हैं जैसे के हम उसे बोलते हैं। नमस्ते शब्द हिंदी भाषा में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। संसार में 150 ऐसे देश हैं यहां पर हिंदी बोली जाती है।

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है इसीलिए हमें इसका सम्मान करना चाहिए सभी देशवासियों को हिंदी बोलने और पढ़ने में गर्व महसूस करना चाहिए

हिंदी दिवस पर निबंध इन 150 शब्दों में 

संस्कृत के शब्द सिंधु से हिंदी शब्द की उत्पत्ति मानी जाती है। सिंधु नदी को सिंधु कहां गया है और इसी आधार पर उसके आसपास की भूमि को सिंदू कहा जाने लगा था। यही सिंधु शब्द बाद में जाकर हिंदू हिंदी और फिर हिंदू गया।
किसी भी राष्ट्र की उन्नति की परिचायक है वहां की मातृभाषा। भाषा से ही किसी राष्ट्र और समाज को पहचान मिलती है हिंदी हमारे संस्कारों से जुड़ी है इसलिए हम गर्व से सभी कहते हैं कि हम हिंदी भाषी हैं। अनेकता में एकता का स्वर  हिंदी के माध्यम से गूंजता है हिंदी भाषा सभी भाषाओं में सबसे बढ़िया भाषा मानी गई है परंतु बहुत अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि एक लंबे और गौरवमई इतिहास के बावजूद हिंदी आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ती नजर आ रही है। आज हिंदी को मात्र दिवस बना कर ही रख दिया गया है आज तक हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा हासिल नहीं हुआ आज भी हमारे कामकाज से लेकर हमारी शिक्षा तक में हिंदी को प्राथमिकता नहीं दी जाती है।

हिंदी बोलने में आज का युवा शर्म महसूस करता है हम अपनी भाषा को आज भी वह सम्मान नहीं दे पाए हैं जो इसे मिलना चाहिए था आज अंग्रेजी भाषा की पैरवी करने वाले कहते हैं कि अंग्रेजी के बिना कोई देश आगे नहीं बढ़ सकता किंतु वह शायद चीन , जापान और ऐसे जैसे देशों को भूल गए जिन्होंने पूर्ण शिक्षा अपनी मातृभाषा में दी है और वह देश आज विकसित देशों की श्रेणी में खड़े नजर आते हैं।

जहां पर मेरा मत यह कदापि नहीं अंग्रेजी भाषा का बहिष्कार हो बल्कि मेरा मत सिर्फ इतना है कि दूसरे की मां के लिए अपनी मां को अपमान करना भी कहीं का धर्म नहीं, पिछले दिनों मेरे एक जानकार ने बड़ी शान के साथ जिक्र किया कि मेरे बेटे को स्कूल में 500 जुर्माना हुआ क्योंकि उसने पहली बार स्कूल में हिंदी का शब्द प्रयोग किया मैं सुनकर हैरान था और सोचने को मजबूर , के हम कहां जा रहे हैं हिंदी भाषा का प्रयोग स्कूल में करने पर अब जुर्माना देना पड़ेगा यह कौन सी सभ्यता है ? यह कहां की संस्कृति है कहा भी गया है कि हिंदी मात्र सरोकारों की नहीं बल्कि संस्कारों की भाषा है आज जरूरत है कि ऐसे शिक्षण संस्थान जहां हिंदी बोलना निषेध है उन पर कार्यवाही हो।

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EssayOnline.in - इस ब्लॉग में हिंदी निबंध सरल शब्दों में प्रकाशित किये गए हैं और किये जांयेंगे इसके इलावा आप हिंदी में कविताएं ,कहानियां पढ़ सकते हैं

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