Wednesday, 2 September 2020

Essay on Holi in Hindi होली पर निबंध

Holi festival essay in Hindi होली पर निबंध

होली भारतीय हिन्दू त्योहार है यह त्योहार हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से हिन्दू लोगों के इलावा नेपाल तथा संसार के अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है।
Essay on Holi in Hindi
होली (Holi) के त्योहार से बहुत सारी कथाएं जुड़ीं हुई हैं जिनमें से प्रमुख कथा प्रहलाद भगत की है माना जाता है के प्राचीन समय में हिरन्यकश्यप नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य था उसने अपनी नगरी में ईश्वर का नाम लेने से पाबंधी लगाई हुई थी और वो चाहता था के लोग सिर्फ उसे ही भगवान माने किन्तु उसका पुत्र प्रहलाद उन्हें ईश्वर नहीं मानता था वह भगवान विष्णु को मानता था हिरन्यकश्यप के समझाने पर भी वह नहीं समझा।

अंत प्रहलाद की ईश्वर के प्रति भक्ति भाव को देख हिरन्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका जिसे आग में ना जलने का वरदान प्राप्त था उसे प्रहलाद को आग में लेकर बैठने के लिए कहा होलिका हिरन्यकश्यप के आदेश अनुसार प्रहलाद को उठाकर अपनी गोद में लेकर आग में बैठी प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ बल्कि होलिका आग में भस्म हो गयी। इसी की याद में होली का यह पर्व मनाया जाता है।

रंगों का यह पर्व परंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है पहले दिन होलिका का दहन किया जाता है जिसे होलिका दहन भी कहा जाता है और इससे अगले दिन रंगों का त्योहार मनाया जाता है लोग एक दुसरे के उपर रंग लगाते हैं बच्चे पिचकारियों से रंग फेंकते हैं तथा गुलाल लगाते हैं ढोल आदि वजाकर होली के गीत गाये जाते हैं। इस दिन हर तरफ ख़ुशी का माहौल होता है।

सच में होली का पर्व रंगों का पर्व है यह त्यौहार प्रसन्नता , उमंग , उत्साह एवं सदभावना का पर्व है।

Essay on Holi in Hindi 1000 words | होली पर निबंध

होली एक खुशियों का त्योहार है यह पर्व हर साल मार्च महीने में खुशी खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है होली पर्व का इंतजार सभी लोग करते हैं यह दुसरे त्योहारों से थोडा अलग होता इस दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाकर होली का त्यौहार मनाते हैं होली का त्यौहार हिंदू लोगों का खास पर्व है किंतु यह त्योहार हर जाति के लोगों द्वारा बड़े ही उत्साह और खुशी-खुशी मनाया जाता है।

होली का त्यौहार 2 दिनों तक मनाया जाने वाला त्यौहार होता है होली के पहले दिन होलिका दहन किया जाता है इस दिन रंगो की होली के 1 दिन पूर्व लोग लकड़ी का ढेर बना कर रात को वह जलाते हैं जिसे होलिका दहन कहा जाता है। होलिका हिरण्य कश्यप नाम के दैत्य राजा की बहन थी जिसे भगवान शंकर द्वारा आग में न जलने का वरदान हासिल हुआ था इसीलिए वह जब प्रह्लाद को आग में लेकर बैठी तो उसके वरदान का उस पर कोई असर नहीं हुआ वह खुद ही इस आग में जलकर खाक हो गई जबकि प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ इस कारण इस संदर्भ में होली का यह त्यौहार मनाया जाने लगा।

होलिका दहन के अगले दिन होली का त्यौहार मनाया जाता है इस दिन सभी लोग अपने मित्र परिवार और सगे संबंधियों के साथ होली का त्यौहार मनाते हैं इस दिन लोग अपने मित्रों और सगे संबंधियों के साथ गले मिलते हैं उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं एवं एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं इस दिन हर तरफ खुशी का माहौल होता है और बच्चे तो पिचकारीयों और गुब्बारों में रंग भरकर एक दूसरे पर फेंकते हैं। होली के खास अवसर पर लोग अपने घरों में मिठाई , नमकीन पापड़ आदि बनाते हैं।

होली में रंगों का इस्तेमाल : होली का त्यौहार मनाने के लिए लोग कई प्रकार के रंगों का इस्तेमाल करते हैं पुराने समय में लोग प्रकृतिक रंगों का प्रयोग करते थे और होली मनाते थे जिनका हमारी स्किन पर कोई नुकसान नहीं होता था किंतु अब केमिकल से बने रंगों का प्रयोग किया जाता है जो हमारी त्वचा को खराब करते हैं इसलिए हमें केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए हमें हमेशा प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए हमें हमेशा गुलाल का ही प्रयोग करना चाहिए ताकि हमारी स्किन को कोई नुकसान ना पहुंचे और किसी को हमें जबरदस्ती रंग नहीं लगाना चाहिए यदि कोई रंग नहीं लगवाना चाहता है तो उस पर कभी भी जबरदस्ती रंग नहीं लगाना चाहिए इसके अलावा हमें केमिकल वाले रंगों से दूर ही रहना चाहिए और इन्हें प्रयोग में नहीं लाना चाहिए क्योंकि केमिकल वाले रंग हर किसी को सूट नहीं करते किसी किसी की तो स्किन संवेदनशील होती है जिन पर यह हानिकारक हो सकते हैं इसलिए लोगों से निवेदन है कि वह केमिकल से बने रंगों का प्रयोग ना करें और कुदरती रंगों का प्रयोग कर अपनी होली को रोमांचक बनाएं।

होली का पर्व भले ही हमारे देश में धूमधाम से मनाया जाता है किंतु रंग और गुलाल के इस पर्व को संसार भर के बहुत से देशों में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है रंगों के इस त्यौहार में लोगों पर एक खास खुमारी छा जाती है इस देना सभी लोग एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं देते हुए एक दूसरे को जमकर गुलाल और रंग लगाते हैं हमारे देश के अलावा विदेशों में रहने वाले लोग भी इस प्यार को बड़े ही उल्लास के साथ मनाते हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय होली के इस त्यौहार को बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं। होली का त्यौहार खुशियों और उमंग भरा पर्व होता है इस दिन हर तरफ खुशियां ही खुशियां छाई होती है इस दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाने के लिए उतावले दिखाई देते हैं। होली के पर्व के दिन लोग अपने घरों में स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं और एक दूसरे को खिलाते हैं इस दिन लोग नए-नए वस्त्र पहन कर होली को खुशी खुशी मनाते हैं।

होली का त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है जो सभी वर्ग के लोगों को एक ही भाईचारे में रंग देता है इस दिन लोग अक्सर ये कह कर एक दूसरे को रंग लगाते हैं कि बुरा ना मानो होली है यह बोल कर वह दूसरों पर रंगों की बौछार कर देते हैं।

होलाष्टक नाम का शब्द होली और अष्टक इन दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है जिसका अर्थ होता है होली के 8 दिन इनका आरंभ होलिका दहन के दिन पूर्व और होली खेले जाने वाले दिन के 8  दिन पूर्व होता है और धुलेंडी के दिन इसका समापन होता है। होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से आरंभ होकर पूर्णिमा तक चलता है। अष्टमी से आरंभ होने की वजह से इसे होलाष्टक पुकारा जाता है। होलाष्टक के आरंभ होते ही होली के त्यौहार के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां भी शुरू होने लगती है।

इस वर्ष यानि के 2019 वर्ष में होलाष्टक का त्यौहार 14 मार्च से लेकर 21 मार्च तक रहेगा। होली के त्यौहार से पूर्व 8 दिनों का जो समय होता है उसे होलाष्टक कहा जाता है। होलाष्टक के दिनों में कोई भी शुभ कार्य करना अच्छा नहीं माना जाता है। यह दिन साल के सबसे अशुभ दिन गिने जाते हैं।

होलाष्टक के आरंभ में होलिका दहन के लिए दो डंडे स्थापित किए जाते हैं जिनमें से एक डंडा होलिका का स्थापित किया जाता है और दूसरा प्रह्लाद भक्त का स्थापित किया जाता है। मान्यताओं के मुताबिक जिस स्थान में होलिका दहन के लिए डंडा गाड़ा जाता है उस क्षेत्र में होलिका दहन तक कोई भी अच्छा काम नहीं किया जाता। अन्यथा ऐसी मान्यता है कि इन दिनों शुभ कार्य करने से अशुभ होता है।

जातिभेद ऊंच-नीच अमीर - गरीब का भेद भूलकर सभी लोगों के द्वारा बड़े ही जोश और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला होली का त्यौहार हमें आनंद और उल्लास और खुशी देता है। होली भारत का सबसे प्राचीन त्यौहार है जो होली होलिका होलाका का नाम से भी जाना जाता है।
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