Wednesday, 2 September 2020

इंटरनेट पर निबंध

Internet par Nibandh (Internet Essay in Hindi Language)


आज का युग विज्ञान का यग है विज्ञान ने हर क्षेत्र में सफ़लता हासिल कर ली है। आज दुनियाभर में इंटरनेट की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी है के एक बटन दबाते ही संसारभर की सभी जानकारियां पलभर में ही हमारी कंप्यूटर की स्क्रीन पर आ जाती है। यह सब हुआ – इंटरनेट (Internet) से । कंप्यूटर और अन्तरिक्ष के माध्यम से यह सब सम्भव हो सका है। इंटरनेट ने मानव जाती को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है हम घर बैठे ही कुछ ही पलों में किसी भी चीज़ की जानकारी हासिल कर सकते हैं यहां तक की इंटरनेट से हम कोसों दूर बैठे लोगों से बातें भी कर सकते हैं।

Essay on Internet in Hindi


वैज्ञानिकों ने बहुत सारे कंप्यूटर (Computer) को एक दुसरे के साथ जोड़कर इंटरनेट की खोज़ की। इंटरनेट का अर्थ है भीतरी जाल। जिस तरह मकड़ी के जाले एक दुसरे से जुड़े होते हैं बस इंटरनेट (Internet) भी इसी प्रकार अनेक कंप्यूटर से एक दुसरे के साथ जुड़ा होता है। इस तरह इस जाल में संसारभर का कोई भी कंप्यूटर अन्य कंप्यूटर से जुड़ जाता है।(Internet par Nibandh)
इन्टरनेट की सहायता से दुनिया में किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति किसी भी तरह की जानकारी को पलक झपकते ही दुसरे व्यक्ति तक आसानी से भेज सकता है भले ही वह हज़ारों -लाखों की मील की दूरी पर क्यों ना बैठा हो। इसीलिए लगातार बढ़ी संख्या में इंटरनेट की लोकप्रियता बढ़ रही है और यह एक सुविधा न होकर मानव की जरूरत बन चुका है।

सन 1955-60 के दौरान दो कोम्पुटर को आपस में जोड़कर जानकारियों का आदान -प्रदान का प्रयास किया गया। सन 1972 में कंप्यूटर और इन्टरनेट पर पहली सभा वाशिंगटन में हुई। यहां पर वैज्ञानिकों ने 40 से ज्यादा कंप्यूटर को आपस में जोड़ा। सन 1972 में एक नयी खोज के द्वारा नेट की मदद से एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति तक संदेश पहुंचाना संभव हो सका जिसे ई -मेल (E-mail) का नाम दिया गया।

सन 1980 के दौरान इन्टरनेट ने सही काम करना शुरू कर दिया और सन 1984 में आकर लगभग हज़ारों कंप्यूटर को एक दुसरे के साथ जोड़ने का कार्य शुरू हुआ और इस दौरान ई -मेल भी काफ़ी लोकप्रिय हो चुकी थी और अगले चार वर्षों में इंटरनेट की लोकप्रियता काफी बड गयी। सन 1991 में WWW (World Wide Web) को आम जनता के लिए शुरू कर दिया गया वर्ल्ड वाइड वेब वास्तव में एक ऐसा नेटवर्क है जिसके द्वारा दुनिया के किसी भी हिस्से में इन्टरनेट से जुड़ा जा सकता है इसकी खोज़ 1989 में टिम वर्नरस नाम के वैज्ञानिक तथा अन्य वैज्ञानिकों ने जनेवा में किया  सन 1991 से पहले इंटरनेट पर एक भी वेबसाइट नहीं थी सन 1994 तक 3000 वेबसाइट बनी थीं जो के अगले एक साल में बढ़कर 30 हज़ार हो गयी सन 1997 में 1 करोड़ से भी ज्यादा वेबसाइट बन चुकी थीं जबकि आज इन्टरनेट पर 100 करोड़ से भी ज्यादा वेबसाइट बन चुकी हैं।

इसीलिए यह अद्भुत देन बहुत ही कम समय में जानकारी भेजने और प्राप्त करने का एक सफ़ल माध्यम बन चुका है इन्टरनेट पर एक ही पुस्तक को करोड़ों लोग एक ही समय में पढ़ सकते हैं इसके साथ -साथ इंटरनेट शिक्षा प्रणाली , व्यापार और जागरूकता सबंधी अभियानों के प्रचार -प्रसार में भी एहम योगदान निभा रहा है। आज इंटरनेट (Internet) के द्वारा दुनियाभर के एक कोने से दुसरे कोने में व्यापार चल रहा है। जिस जानकारी को पहले एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में महीनों -साल लग जाते थे वहीँ जानकारी आज पल भर में ही पहुंच जाती है। यह विज्ञान की एक अनोखी और बेशकीमती देन है जिसे किसी भी हालात में नाकारा नहीं जा सकता है। इंटरनेट जानकारियों का ऐसा संग्रह है जिसके बारे में जितना जानो उतना ही कम पड़ जाता है।

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