Wednesday, 2 September 2020

जल संकट पर निबंध Essay on Jal Sankat in Hindi

जल संकट पर निबंध Essay on Jal Sankat in Hindi

पर्यावरण के वैश्विक क्षरण जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान जैसे संकट पूरी पृथ्वी के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं ऐसे में दुनिया भर में पानी की भयावह कमी को इंगित करती संयुक्त राष्ट्र की विश्व जल दिवस रिपोर्ट पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है विश्व जल दिवस के अवसर पर 22 मार्च को यूनेस्को द्वारा प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि दुनिया की करीब एक तिहाई आबादी को ठीक से साफ पानी नहीं मिल पाता ऐसे में 2.1 अरब लोगों में से लगभग 1 अरब भारत में रहते हैं पानी की कमी जानलेवा बीमारियों का कारण बनती है पेयजल के साथ बढ़ते शहरीकरण सिंचाई की जरूरत तथा बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं की चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस जल प्रबंधन की दरकार है।

Essay on Jal Sankat in Hindi

जल संकट से जुड़े आंकड़े :

  1. संसारभर में 2.1 अरब लोगों को पीने लायक साफ पानी नहीं मिल पाता है।
  1. गंदे जल एवं स्वच्छता की कमी के चलते रोजाना पांच वर्ष से कम उम्र के सात सौ से भी ज्यादा बच्चों की मृत्यु डायरिया की वजय से हो जाती है।
  1. वर्ष 2030 आने तक 70 करोड़ लोगों को जल की गंभीर कमी के चलते विस्थापित होना पड़ सकता है।
  1. साल 2050 तक संसार की जनसंख्या में तकरीवन 2 अरब लोग और जुड़ जायेंगे और उस वक्त आज की तुलना में जल की मांग 30 फीसदी तक अधिक बढ़ जाएगी।
  1. संसारभर के 15.9 करोड़ लोगों के जल पीने का साधन तालाब एवं नदी है।
  1. कृषि में सबसे ज्यादा पानी खर्च किया जाता है इसके उद्योगिक कारखानों में पानी की बड़ी मात्रा को खर्च कर दिया जाता है।
पीने के साफ पानी का मुख्य स्रोत भूजल है इसलिए हमारी सारी कोशिशें इस बात की होनी चाहिए कि भूजल का अच्छी तरह से संरक्षण हो ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पीने का साफ पानी मिल सके दुख की बात यह है कि हमने भूजल स्तर को बनाए रखने की कोशिश नहीं की जिसका खामियाजा यह हुआ के बीते 30 और 40 साल में भूजल स्तर लगातार नीचे होता क्या है साथ ही भूजल की गुणवत्ता भी बिगड़ती गई है और इसकी पहुंच भी लोगों में कम होती जा रही है भूजल का मुख्य स्रोत बारिश का पानी होता है बारिश का पानी सीधे भूमि में नहीं पहुंचता माध्यम से के जरिए पहुंचता है जहां जहां भी जंगल होगा वहां वहां जमीन के पानी सूखने की क्षमता अधिक होगी और वह भूजल स्तर ऊंचा होगा जय सर्वज्ञ तथ्य है के जंगल के पास बहती नदी सदानीरा होती है जहां जंगल काटा सदानीरा खत्म जाना जंगल का यह विज्ञान है

नदी और भूजल का आपस में परंपरिक संबंध है और किसी एक के सूखने से दूसरे का प्रभावित होना लाजमी है कुछ क्षेत्रों की नदी भूजल को रिचार्ज करती है और कुछ क्षेत्रों की नदी भूजल के डिस्चार्ज से बनती है भोजन किस तरह बनने को ही हमारी सरकारें अनदेखी करती है इस अनदेखी से ही भूजल के रिचार्ज होने की प्रणाली बिगड़ गई है जाहिर सबसे बड़ी समस्या है जिससे कि हमारा भूजल स्तर  लगातार नीचे होता चला जा रहा है जहां पर नम भूमि है वहां भी बारिश का पानी भूमि में सुरक्षित हो
जाता है जिस क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तालाब , पोखर जल स्रोत होते हैं उन क्षेत्रों में भूजल स्तर ऊंचा बना रहता है।

ज्यादा दोहन ज्यादा बड़ा संकट  : प्रदूषण को नियंत्रण करने का हमारा ट्रैक रिकॉर्ड बहुत ही खराब है प्रदूषण का असर भी भूजल पर पड़ता है इसको लोग समझते नहीं अगर नदी प्रदूषित होगी तो उससे जो भी जल रिचार्ज होगा वह गंदा होगा नदियों और तालाबों में सीवेज के पानी से पैदा हुए जल प्रदूषण से भूजल स्तर बिगड़ रहा है सरकारें इस प्रदूषण को नियंत्रण करने में नाकाम रही है किसी भी तरह के प्रदूषण को बढ़ावा देना एक प्रकार का अपराध है क्योंकि इससे लोगों की सेहत और फिर जिंदगी का नुकसान होता है

 हमारी जियोलॉजी भी भूजल को प्रभावित करती है जियोलॉजी में आर्सेनिक  और फ्लोराइड जैसे तत्व होते हैं भूजल का स्तर जब नीचे जाता है और जब ऑक्सीडेशन होता है तब यह तत्व पानी में घुल जाते हैं इसी कारण पूर्वी भारत और बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर आर्सेनिकयुक्त पानी में मिलने लगा है जाहिर है भूजल के स्तर  का निम्नतम होने का खतरा है भूजल का दोहन और उपयोग जिस तरह बेतहाशा बढ़ रहा है वह बड़ा जल संकट पैदा करने के लिए काफी है भूजल का रिचार्ज कम हो रहा है लेकिन उसका दोहन बढ़ रहा है जिसका खामियाजा यह  होगा कि कुछ समय बाद भूजल खत्म हो जाएगा और लोग साफ पानी के लिए तरस जायेंगे।

देश का जल तंत्र बेहाल : इसी साल सीएजी की रिपोर्ट आई है कि देशभर में जो ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल और पीने का पानी है उसकी हालत बहुत खराब है रिपोर्ट कहती है कि पिछले 5 साल में 82000 करोड रुपए खर्च हुए हैं लेकिन इसके बावजूद लोगों को साफ पानी मुहैया नहीं किया जा सका भूजल और साफ पानी के मुद्दे पर हमारी सरकार नाकामयाब रही है लेकिन जो हमारे लिए कोई बड़ी खबर नहीं बनी देश भर में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लगातार बढ़ रहे शहरी क्षेत्रों के लिए उद्योगों के लिए और कृषि के लिए इन सब के लिए पानी की बड़ी मात्रा की जरूरत पड़ती है जो भूजल दोहन से पूरा किया जाता है यह जरूरत तो बढ़ती ही जा रही है किंतु हमारी सरकारें इस मुद्दे पर सक्रिय नहीं है इसका मुख्य कारण यही है कि जल का संरक्षण पॉलीटिकल इकोनामी का मामला है

देश के जल तंत्र को केंद्रीय जल आयोग और जल संसाधन मंत्रालय नियंत्रण करते हैं इन दोनों बड़ी संस्थाओं का ध्यान बड़ी योजनाओं पर होता है बड़े-बड़े बांध या फिर लिंकिंग जैसी बड़ी परियोजनाओं पर ही जे संस्थाएं काम करती है जिसमें बड़े पैमाने पर पैसे का आवंटन होता है वही भूजल नियंत्रण के लिए ग्रामीण सत्र पर छोटी-छोटी क्षेत्रीय स्तर की योजनाएं बनानी होगी जिसमें बड़ी धनराशि का आवंटन संभव नहीं है जानी छोटी-छोटी योजनाओं के लिए थोड़ी थोड़ी राशि की जरूरत पड़ेगी जिसमें से भ्रष्ट लोगों के पास बड़ी राशि का रिसाव नहीं जाएगा जाहिर है जितनी बड़ी परियोजना उतना बड़ा मुनाफा हमारे देश के जल तंत्र पर यही माइंडसेट हावी है जिसकी वजह से भूजल के नियंत्रण से संबंधित सभी समस्याओं की तरफ ध्यान ही नहीं जाता है।

Jal sanrakshan essay 1000 words

समाज और परंपरिक जल स्रोतों : बारिश के पानी का हम सिर्फ 6% ही संरक्षण कर पाते हैं जिस मिट्टी में पानी सूखने की ताकत जितनी ज्यादा होगी वहां भूजल का स्तर उतना ही बेहतर होगा इसलिए जरूरी है कि मिट्टी की रोकने की क्षमता बढ़ाई जाए यह सब शोध का एक विषय है दूसरी बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो तालाब , पोखर आदि जल स्रोत है उनको रिचार्ज करने की जरूरत है यह काम गांव के लोग ही कर सकते हैं भारत में ब्रिटिश शासन से पहले ग्रामीण समाज को लगता था कि तालाब , पोखर , जोहड़ की देखभाल और उन्हें बचाने का काम उसका है देश में जब ब्रिटिश सत्ता हुई तो अंग्रेजों ने कहा कि तालाब , पोखर की जिम्मेदारी सरकार की है ग्रामीण समाज की नहीं यही खेल बदला आजादी के बाद हमारी सरकारों ने भी यही किया और समाज से उनके स्थानीय जल स्रोत छीन लिए इसका नतीजा सामने है आज पोखर तालाब ही नहीं तमाम छोटी बड़ी नदियां में प्रदूषित हो चली है ग्रामीण समाज और जल स्रोतों को जोड़ने की जरूरत है।

नदियों को साफ करने के लिए बड़ी-बड़ी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हम कर रहे हैं खूब पैसा लगा रहे हैं लेकिन उसे नदी साफ होगी कि नहीं इस और हमारा ध्यान नहीं है दरअसल नदी साफ करने के लिए बड़ी टेक्नोलॉजी के साथ साथ गवर्नेस का होना जरूरी है जो फिलहाल नहीं है हमारे देश में नदियों को लेकर कोई गवर्नेस ही नहीं है देश में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड है स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड है कानूनी शक्तियां है लेकिन इन सब के बावजूद हमारे पास प्रदूषण से नियंत्रण की एक भी सक्सेस स्टोरी नहीं है क्योंकि गवर्नेस जीरो है गवर्नेंस का अर्थ है पूरे जल तंत्र का विकेंद्रीकरण कर उसको ग्रामीण समाज से जोड़ना तभी संभव है कि नदियां साफ होंगी और लोगों को पीने का साफ पानी मिल सकेगा।

देश के जलाशय :
हमारे देश में 91 महत्वपूर्ण जलाशय है जिन की निगरानी केंद्रीय जल आयोग करता है जय जलाशय उत्तरी (हिमाचल प्रदेश पंजाब और राजस्थान) पूर्वी (झारखंड , उड़ीसा , पशिचम बंगाल)
शुद्ध जल दिनों दिन घटता जा रहा है एक रिपोर्ट के मुताबिक यह बताया गया के यदि पानी का दोहन नहीं रोका गया तो देश को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है हमारे देश में आज 75 फीसदी घरों में पीने लायक पानी नहीं पहुंच पाता है आंकड़े बताते हैं के 1951 में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता जहां 5177 घन मीटर थी वह वर्ष 2025 तक घटकर 1371 घन मीटर हो जायेगी

कुल भूजल का जल 24 फीसदी सिर्फ भारत के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है इस तरह से भारत भूजल इस्तेमाल करने के मामले में पहले स्थान पर है हमारे भारत देश में एक अरब लोग जहां पानी की किल्लत रहती है वहां रहते हैं जबकि 60 करोड़ लोग गंभीर इलाकों वाले क्षेत्र में रहने के लिए मजबूर हैं।

Jal Sankat essay : पानी की एक एक बूँद कीमती है आओ इसे बचाइए किन्तु हमें पानी की कीमत तो तभी मालूम होती है जब हमें जोरों से प्यास लगी होती है यदि आज से हमने पानी को बचाने के बारे में नहीं सोचा तो वो दिन दूर नहीं होगा जब हम पानी की एक एक बूँद के लिए तरसेंगे और हमें उस समय पानी उपलब्ध नहीं होगा, आज कल जल संरक्षण के प्रति ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने की जरूरत है और हम बारिश के पानी क इकट्ठा कर इसका उपयोग जरूरत पड़ने पर कर सकते हैं।

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