Thursday, 3 September 2020

Essay on Lohri in Punjabi लोहड़ी पर निबंध

Essay on Lohri in Punjabi - लोहड़ी पर निबंध : लोहड़ी भारत के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है खासकर यह पंजाब प्रांत में बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है। बाज़ारों में खूब रौनक और चहल पहल के साथ मूंगफली , रेवड़ी और गचक के साथ दुकानें सज जाती हैं। इस दिन पंजाबी दिन खोलकर अपने मित्रों और रिश्तेदारों को उपहार देते हैं।

लोहड़ी (Lohri) का त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व सूरज ढलने के पश्चात शाम के समय मनाया जाता है। लोहड़ी में समाहित शब्द 'लो' को लकड़ी 'ओह' मतलब 'उपले' और 'ड़ी' को रेवड़ी का प्रतीक माना जाता है।  दिन भर काम काजों में उलझे हुए लोग जब अपने लिए समय नहीं निकाल पाते , तो लोहड़ी का यह दिन लोगों में आपसी भाईचारे की भावना को पैदा करता है इस दिन सभी अपने परिवार और मोहल्ले के लोगों के साथ अलाव के चारों और बैठकर खाते पीते और भंगड़ा आदि करते हैं। आग की मीठी सी गर्माहट में अपने सुख दुख बांटते हुए और लोगों में प्रेम और भाईचारे की भावना का संदेश देता है लोहड़ी का यह पर्व।

Essay on Lohri in Punjabi



Lohri Festival Essay Hindi & Punjabi

लोहड़ी की पूजा : लोग अपने मोहल्ले की खुली जगह पर सारी लकडियां और उपले चिनकर एक बड़ा सा ढेर बना लेते हैं और शाम के समय मोहल्ले के सभी लोग आग के इस अलाव के चारों और बैठकर आग की गर्माहट महसूस करते हैं गीत गाये जाते हैं भांगड़ा पाया जाता है। गुड , मक्की और तिल आग में अर्पित किये जाते हैं “ईशर आये दलिदर जाए दलिदर दी जड़ चुल्ले पाए” यह बोलकर ईश्वर से सुख स्मुर्द्धि की कामना की जाती है। वहां मौजूद सभी लोग एक दुसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं देते हैं और सभी में मूंगफली , गचक और रेबडी बांटी जाती है।

Punjab Mein Lohri : इस दिन पंजाब के ज्यादातर गांवों में गन्ने के रस की खीर बनाई जाती है और साग के साथ मक्की की रोटी बनाना शुभ माना जाता है। लोहड़ी के कुछ दिन पहले बच्चों की टोलियां घर -घर जाकर लोहड़ी मांगती हैं लोग उन्हें ख़ुशी-ख़ुशी उपले , रेवड़ी , गजक आदि देते हैं। बच्चे भी लोहड़ी मांगते हुए कुछ गीते गाते हैं जैसे



“दे माई लोहड़ी
तेरी जीवे जोड़ी”
********
“दे माई पाथी
तेरा पुत चडुगा हाथी।“

जिनके घरों में बेटा हुआ हो जा किसी के बेटे के विवाह के बाद पहली लोहड़ी हो तो खूब धूम धाम से मनायी जाती है समय के साथ आज तो बेटी के जन्म पर भी लोहड़ी पर पंजाबी लोग खूब जश्न मनाते हैं ढोल पर भंगड़ा पाया जाता है खूब नाच गाना होता है महिलाएं गिद्दा और गीत गाती हैं।

लोहड़ी से सबंधित कथा - वैसे तो लोहड़ी से सबंधित बहुत कथाएं प्रचलित हैं किन्तु दुल्ला भट्टी की कथा ख़ास महत्व रखती है कहते हैं के दुल्ला भट्टी नाम का एक डाकू था जो हमेशा गरीबों की सहायता किया  करता था। माना जाता है के पंजाब में संदलबार में लडकियों को गुलामी के लिए बेचा जाता था जब दुल्ला को इस बारे में मालूम हुआ तभी उसने एक योजना के तहत सभी लडकियों को रिहा करवाया व उनकी शादी भी करवाई जिस कारण उसे पंजाब के नायक की उपाधि भी दी गयी।

इस दौरान उसने गांव की दो अनाथ सुन्दरी व मुन्दरी नाम की दो बेहद सुंदर लडकियों को अपनी बेटियां बनाकर उनका विवाह करवाया और उनका कन्यादान किया उस वक्त उनकी शादी के समय दुल्ले के पास शगन में शक्कर के सिवाए और कुछ नहीं था तो उसने सेर भर शक्कर दोनों लडकियों की झोली में डाल उन्हें विदा किया था।
Lohri Lok Geet
सुंदर मुंदरिये  ... हो
तेरा कौन विचारा ... हो
दुल्ला भट्टी वाला ... हो
दुल्ले ने धी व्याही ... हो
सेर शक्कर पायी ... हो
कुड़ी दा लाल पटाका ... हो
शालू कौन समेटे ... हो
चाचा गाली देसे ... हो
चाचे चूरी कुट्टे ... हो
जिमिदारा लुट्टी ... हो
जिमीदार सदाए ... हो
गिन गिन पोल लाए ... हो
इक पोला घिस गया
जिमिदारा वोटी ले के नस गया
"लोहड़ी की शुभकामनाएं"

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