Tuesday, 1 September 2020

Essay on Mango in Hindi : आम पर निबंध

Essay on Mango in Hindi Essay on Mango in Hindi 

आम को फ़लों (Fruits) का राजा कहा जाता है और यह भारत का राष्ट्रीय फ़ल भी है। यह गर्मी के मौसम में पाया जाता है। फ़ल एक गूदेदार फ़ल है जो वैज्ञानिक दृष्टि से मैग्निफेरा प्रजाति से सबंधित है। आम दुनियाभर में सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाला फ़ल भी है। आम में बहुत सारे पोष्टिक तत्व पाए जाते हैं जैसे विटामिन ए , बी और सी होते हैं। आम की छाल और पत्तों से कई प्रकार की दवाईयां बनाने का काम किया जाता है। इसके इलावा अचारी आम से अचार , जैम , चटनी आदि बनाई जाती है।

आम कच्चा और पक्का दोनों प्रकार से खाया जा सकता है कच्चे आम का ज्यादातर चटनी , आचार , मुरुबा , सरबत आदि बनायी जाती हैं। भारत के आम का आचार भारत के इलावा विदेशों में भी बहुत पसंद किया जाता है। आम की बहुत सारी प्रजातियां पायी जाती हैं जैसे सफेदा , दशहरी , लंगड़ा आम , मालदा ,सिंदूरी आदि छोटे -बड़े आकारों में पाए जाते हैं।

भारतीय आम (Indian Mango) आज संसारभर में प्रसिद्ध है। गर्मी के दिनों में आम खाने का मज़ा ही निराला होता है आम का नाम लेते ही मूंह में पानी आ जाता है। आम में कई प्रकार के विटामिन भी पाए जाते हैं जो हमारे शरीर के लिए बड़े ही फायदेमंद होते हैं । इसे बच्चों से लेकर बूढों तक सभी प्रकार के लोग बड़े चाव से खाते हैं। आम का फ़ल विभिन्न प्रकार के रंगों में पाया जाता है जैसे पीला , नारंगी , लाल और हरा रंग। विश्वभर में आम की सबसे ज्यादा पैदावार भारत में ही की जाती है।

आम (Mango) का पेड़ बहुत बड़ा और चारों तरफ़ से फ़ैला हुआ होता है। इसकी उंचाई लगभग 40 से 90 फीट तक हो सकती है। आम के पेड़ की छाल खुरदरी होती है। इस पेड़ की पत्तियां लम्बी और नुकीली होती हैं यह 5 से 15 इंच तक लम्बी 3 इंच तक चौड़ी और गहरे हरे रंग की होती हैं। भारत में आम (Mango) के पेड़ों की बहुत सारी किस्में पायी जाती हैं। इसके इलावा आम के पेड़ की धार्मिक महत्ता भी बहुत ज्यादा है धार्मिक दृष्टि से इसे पवित्र माना जाता है इस पेड़ की लकड़ी और पत्तियां कई धार्मिक स्थानों पर इस्तेमाल की जाती है। हवन में आम की लकड़ी को जलाया जाता है।

आम के पेड़ पर सबसे पहले हरे रंग के फ़ल लगते हैं समय के साथ -साथ यह पक कर पीला जा हल्का लाल हो जाता है। आम के फ़ल में एक बड़ी सी गुथली होती है अगर आम खाने के बाद बची गुठली को सही जगह दवा दिया जाए तो वहां पर आम (Mango) का पेड़ उग आता है। आम के पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल कई प्रकार की घरेलू चीज़ें बनाने में किया जाता है। आम के पेड़ पर फ़ल साल में सिर्फ़ एक बार ही आता है। आम के पेड़ पर फ़ल लगने से पहले उस पर फूल लगते हैं धीरे -धीरे इससे फ़ल बनना शुरू हो जाता है।

आम गोंद देने वाला पेड़ है इसके पुराने पेड़ों के तनों और शाखाओं पर गोंद निकलता है । आम के पत्तों के डंठल लम्बे और मजबूत होते हैं तथा आम के नए पत्ते बड़े कोमल और गुलाबी रंग के होते हैं कुछ वक्त के पश्चात इनका रंग हरा हो जाता है। बसंत के शुरू होते ही आम के पेड़ों पर फूल आना शुरू हो जाते हैं और मार्च से अप्रैल तक पेड़ फूलों के गुच्छों से भर जाता है जिन्हें बौर कहा जाता है । आम के पेड़ पर फूलों के झरते ही इस छोटे –छोटे फ़ल आने आरंभ हो जाते हैं।

आम की प्रजातियों में बहुत सारी विभिन्नता पायी जाती है जैसे इनके रंग , आकार और स्वाद में काफ़ी फर्क देखने को मिलता है । यह फ़ल हरापन से शुरू होकर पीले रंग के हो जाते हैं और पीले से लाल भी हो जाते हैं आम का गूदा पीला , सफेद और नारंगी रंग का होता है ।

भारत में पाए जाने वाले आम के आकार , रंग , गूदे , रस के स्वाद बाकी आमों से काफ़ी फर्क होता है । आम उतर भारत के इलावा दक्षिण भारत में भी काफ़ी बड़े पैमाने पर उगाया जाता है ।

देखा जाए तो आम को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है गूदे वाला आम और रसवाला आम गूदे वाले आमों में दशहरी , लंगड़ा , चौसा आदि किस्में आती हैं चूसने वाले आमों में बिहार का सुकुल आम प्रमुख है ।

आम एक बड़ा ही उपयोगी वृक्ष है इसकी लकड़ी , छाल , पत्ते , गोंद , बीज बड़े ही उपयोगी होते हैं इसके इलावा यह पेड़ औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है इसके तने , शाखा और छाल से कई प्रकार की आयुर्वेदिक दवाईयां तैयार की जाती हैं आम की सूखी हुई पत्तियों का चूर्ण मधुमेह के रोगियों के लिए काफी फ़ायदेमंद होता है आम के ताज़े हरे पत्ते चबाने से मसूड़े मजबूत बनते हैं इसके इलावा आम की लकड़ी पानी में लम्बे समय तक भी ख़राब नहीं होती जिस कारण इससे कई प्रकार की टिकाऊ वस्तुएं तैयार की जाती हैं । इस फ़ल को इसीलिए ही नहीं फलों का राजा कहा जाता है


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