Wednesday, 2 September 2020

Essay on Peacock in Hindi मोर पर निबंध

मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है जो 26 जनवरी 1963 को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया था। मोर एक सर्वहारी पक्षी है जो फ़ल , बीज , अनाज , चूहे , मेंढक ,घोंघे और सांप तक खा जाता है विश्वभर में  मोर की तीन किस्में पायी जाती हैं जैसे बर्मा का मोर , कांगों का मोर और भारतीय मोर मोरनी का प्रजनन काल जनवरी से अक्तूबर महीने के बीच होता है। मोर मोरनी को सेक्स के लिए आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रकार की आवाजें निकालता है।

Essay on Peacock in Hindi



(मोर पर निबंध)

मोरनी एक बार में 3 से 5 अंडे देती है और मोरनी के अंडे मुर्गी के अण्डों से कुछ बड़े होते हैं इनका रंग क्रीम जैसा हल्का पीला होता है। हिन्दू धर्म में मोर के पंखों की काफी महत्ता है श्री भगवान कृष्ण इसे अपने माथे पर लगाकर रखते थे। इसके इलावा हिंन्दु ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का वाहन मोर है। मोर ज्यादातर भारत में ही पाए जाते हैं। मोर (Peacock) को मयूर , मंजूर , मनिया आदि नामों से भी पुकारा जाता है। मोर को आराम करना बहुत पसंद होता है जे रात होने पर वृक्षों के उपर चला जाता है और सुबह सूर्य निकलने तक सोता रहता है।

बारिश के मौसम में मोर बादलों की काली घाट को देख नाचने लगता है और मोर के नृत्य से खुश होकर मोरनी मोर की तरफ़ आकर्षित हो जाती है। इसे  किसान का अच्छा दोस्त माना जाता है क्योंकि यह फ़सलों को बर्बाद करने वाले कीटों को चट कर जाता है। मोर ज्यादातर देर तक हवा में नहीं उड़ पाता। मोर (Peacock) अपना घोंसला घनी झाड़ियों के बीच बनाते हैं। मोर की उम्र 10 से 25 वर्ष तक होती है।

Short Essay on Peacock in Hindi

मोर पक्षियों का राजा है और भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। यह पक्षियों में सबसे निराला है-सबसे सुन्दर है। बाल. बालिका मोर को देखने के लिए बहुत उत्सुक रहते हैं।
मोर बड़े-बड़े वृक्षों पर रहता है। सवेरा होते ही वह अचानक 'के-के' बोल उठता है। उसकी बोली बहुत प्यारी होती है। मोर पक्षी का शरीर बहुत बड़ा और भारी होता है। इसके पंख बहुत घने, भारी तथा लम्बे होते हैं। उस पर अनगिनत चाँद से बने होते हैं।
पंखों का रंग चमकीला-सुनहराजामनी-नीला होता है। संसार में किसी भी पक्षी के पंख इतने सुन्दर नहीं होते। मोरनी के पंख लम्बे नहीं होते। उसका शरीर भी इतना सुन्दर नहीं होता।
जब बादल घिर आते हैं या जब सूर्य अस्त होने लगता है तब मोर नाचता है। इसका नाच बहुत प्यारा होता है। यह ताल के साथ नाचता-थिरकता है।

जब ताल पर यह जमीन पर पाँव मारता है, तब इसके सारे पंख सिहरते हैं और उनसे सरसर की आवाज होती है। मोर थिरक-थिरककर नाचता हआ पाँव का ठुमका देता है। अपने नाच पर मुग्ध होकर मोर अपनी कलगी सीधी-ऊंची कर लेता है। जब मोर नाच रहा हो तो उसके पास नहीं जाना चाहिए । नहीं तो वह अपने पंख समेतकर नाचना बन्द कर देता है।

बीज, फल और कीड़े आदि मोर का भोजन है। वह सांपों को मार डालता है। इस तरह यह साँपों से मनुष्य को बचाता है। यह मनुष्य का उपकार करने वाला पक्षी है।

वनों, बागों और मन्दिरों में भी बहुत से मोर रहते हैं। ये दिन में पेड़ों से नीचे उत्तर आते हैं। मोर जब नाचते है, तो मोरवी पास बड़ी गर्व से उसका नाच देखती रहती है। मोर के पैर सुन्दर नहीं होते। परन्तु उन पैरों का नाच बहुत सुन्दर होता है। भारत को अपने मोर पक्षी पर गर्व है।

Must Read-

SHARE THIS

Author:

EssayOnline.in - इस ब्लॉग में हिंदी निबंध सरल शब्दों में प्रकाशित किये गए हैं और किये जांयेंगे इसके इलावा आप हिंदी में कविताएं ,कहानियां पढ़ सकते हैं

0 comments: