Thursday, 3 September 2020

Essay on Population in Hindi जनसंख्या विस्फोट पर निबंध

Essay on Population in Hindi जनसंख्या विस्फोट पर निबंध

Essay on Population in Hindi

इस बात से सभी अवगत है कि आज विश्व भर में सबसे अधिक उत्पादन यदि किसी वस्तु का बढ़ रहा है तो वह है मनुष्य का उत्पादन। घड़ी की सुई इधर टिक करती है और उधर संसार में कहीं ना कहीं कुछ नवजात शिशु जन्म लेते हैं। 1 सप्ताह गुजरता है तब तक तो विश्व की जनसंख्या के पुराने आंकड़ों में लाखों शिष्यों की वृद्धि हो जाती है इसीलिए तो कोई भी जनसंख्या विशेषज्ञ पृथ्वी की जनसंख्या की शत-प्रतिशत जानकारी कभी दे ही नहीं पाता क्योंकि जब तक वह एक वाक्य बोलेगा इतनी देर में ही हजारों शिष्यों की संख्या और बढ़ जाएगी ऐसे हालातों के चलते किसी विशेषज्ञ ने बहुत सुंदर बात कही के यदि हम स्वेच्छा से जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रण में नहीं लाएंगे तो प्रकृति बड़ी क्रूरता से इस कार्य को संपन्न करेंगी फिर चाहे वह हमें पसंद आए ना आए।

जनसंख्या वृद्धि: इन दिनों संसार में हिंसा की आग बड़ी तेजी से फैल रही है हत्या, मारपीट, उपद्रव, दंगे, लूटमार और अपराधों में बड़ी तेजी से बाढ़ आ रही है क्या हम में से किसी ने कभी यह सोचा है कि हिंसा वृत्ति इतनी उग्र क्यों होती जा रही है इस पर विभिन्न दृष्टिकोण से विचार और कई परीक्षण करने के बाद यह सिद्ध हुआ है कि बढ़ती जनसंख्या का दबाव मनुष्य को ओछा और असहिष्णु और असंतुलित बना देता है। इसी कारण आजकल लोग बहुत जल्दी उत्तेजित हो होते जा रहे हैं और ना करने वाले कर्म कर बैठते हैं संख्या के दबाव कामनो वैज्ञानिक का प्रभाव जांचने के लिए किए गए प्रयोगों में यह देखा गया कि छोटे छोटे जानवर जब खुले और शांत वातावरण में रहते थे तब उनकी प्रकृति बहुत शांति थी किंतु जब उन्हें भीड़ भाड़ में रखा गया तो वह अत्यंत ही उत्तेजित और थके मांदे रहने लगे और उनमें एक दूसरे पर आक्रमण करने की प्रवृत्ति भी बढती  देखी गई यह तो सर्वविदित है कि अधिक भीड़ - भाड़ के कारण मल मूत्र पसीना तथा रद्दी चीजों की गंदगी भी बढ़ती है और शरीर से निकलने वाली ऊष्मा भी अपने नेटवर्क वातावरण को प्रभावित करती है मनोशास्त्रीयों के अनुसार ये विकृतियाँ ही प्राणियों को उत्तेजित करती है और यही कारण है कि छोटे छोटे गांव की उपेक्षा कस्बों में तथा कस्बों की अपेक्षा आज शहरों में अधिक अपराध होते दिख रहे हैं।

हत्या और आत्महत्या का अनुपात भी इन्हीं कारणों से सघन आबादी वाले क्षेत्रों में अधिक पाया गया है. पृथ्वी के 70% हिस्से में जल है जिसमें से 67%  हिस्सा समुंदर का है समुंदर का जो पानी ना तो पीने दोगे होता है ना कल कारखानों और ना कृषि उद्योगों के लिए उपयुक्त है। 2% जल बर्फ के रूप में उत्तरी दक्षिणी ध्रुव तथा ऊंचे पर्वतों की चोटियों पर जमा रहता है और केवल 1% जल ही ऐसा होता है जो खेती जंगल उद्योग धंधों तथा पीने के काम में लाया जा सकता है ऐसे में बढ़ती हुई जनसंख्या की जरूरत की पूर्ति के लिए सबसे ज्यादा उपलब्ध कराना मुश्किल होता जा रहा है।

रोकथाम : सरकार संतति निरोध के लिए लोगों को कृत्रिम साधन तथा डॉक्टरी सुविधाओं देती है और उसके लिए वह परिवार नियोजन केंद्रों डॉक्टरों तथा कृत्रिम प्रसाधन पर करोड़ों रुपए भी खर्च करती है। जागरूकता के नाम पर भारत में कई कार्यक्रम हर वर्ष चलाए गए मसलन ‘हम दो हमारे दो’ का नारा लगाया गया लेकिन लोग हम दो हमारे दो का बोर्ड को दीवार पर लगा देख लेते हैं परंतु घर जाकर सब कुछ भूल के तीसरे की तैयारी में जुट जाते हैं। अपनी अनियंत्रित कामेच्छा की वजह से हम आज अपने ही देश को बर्बादी की तरफ धकेल रहे हैं इस बात की महसूसता कितने में होगी? बमुश्किल ऐसा कोई निकलेगा जो इस परिस्थिति को गंभीरता से समझता होगा ऐसे में यह कहना अनुचित नहीं होगा कि जल्दी गैर जिम्मेदाराना यौन सबंध भोग चुनौतीपूर्ण जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण है तो उसे नियंत्रित करने का प्रभावी समाधान है ब्रह्मआचार्य आत्म संयम।

जनसंख्या संकट पर निबंध: अब तक ऐसा माना जाता था कि ब्रह्मचर्य का अभ्यास केवल उन लोगों के लिए अनिवार्य है जिन्होंने अपने घर का त्याग कर जंगल का रास्ता ले लिया है लेकिन अब समय आ गया है कि लोगों के मन से यह गलत मान्यता को निकाल कर उन्हें इस बात का आत्मविश्वास दिलाया जाए कि हर कोई एक आसान मानसिक प्रशिक्षण के द्वारा ब्रह्मचारी को अपने जीवन में बिना कोई गतिरोध के अपना सकता है। इसके लिए प्रचलित शरीर चेतना से बाहर निकल कर खुद को आतम चेतना की तरफ ले जाना है अर्थात अपने शरीर को भूल कर हमें खुद को चैतन्य आत्मा समझना है जरा सोचिए अंतर चेतना का एक छोटा सा परिवर्तन जनसंख्या विस्फोट की विशाल समस्या के समाधान में कितनी बड़ी भूमिका अदा कर सकता है?
अतः विश्व के सभी देशों की सरकारों को ये समझना चाहिए कि परिवार नियोजन पर जितना धन और जन शक्ति पर खर्च कर रही है उतना यदि ब्रह्मचर्य के लाभ के बारे में लोगों को शिक्षित करने में खर्च करें तो संपूर्ण विश्व का निश्चित ही कल्याण हो सकता है।

Population Day (जनसंख्या दिवस) : हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को जनसंख्या वृद्धि से होने वाले खतरों से उन्हें जागरूक किया जा सके और छोटा सुखी परिवार का महत्व समझाया जा सके .

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