Wednesday, 2 September 2020

Essay on Winter Season in Hindi शरद ऋतु पर निबंध

सर्दी का मौसम दशहरे का त्योहार आने से दस-पन्द्रह दिन पहले सर्दी आरम्भ हो जाती है। कार्तिक, अगहन (मग्घर), पौष और माघ-चार महीने सर्दी रहती है। जाड़ा बढ़ते-बढ़ते अरहरऔर मटर के पौधों में लाल-पीले फल लगने लगते हैं। अलसी के खेत नीले फलों से लद जाते हैं।
Short essay on Winter Season in Hindi
fig. Short essay on Winter Season in Hindi
गन्ने के खेत में गन्ने इतने ऊँचे हो जाते हैं कि उनके पीछे खड़ा आदमी दिखाई नहीं देता। सर्दी आरम्भ होते ही खली छत पर सोने वाले कमरों के अन्दर सोने लगते हैं। बालिकाएँ और बालक अपने-अपने स्वेटर निकालकर पहनने लगते हैं।

ठण्डी हवाएँ चलने लगती हैं। सवेरे-शाम अधिक ठण्ड होती है। तब बालक कोट आदि पहनकर बाहर निकलते हैं। बालिकाएँ शाल लेकर बाहर जाती हैं। सर्दी के दिन छोटे होते हैं। कब दिन हुआ, कब साँझ, पता ही नहीं चलता। जाड़े की रात अधिक ठण्डी होने के कारण कोई काम नहीं हो पाता। अतः दिन में ही जल्दी-जल्दी काम कर लेना चाहिए।

जब सर्दी बढ़ जाती है, तो सोते हुए, कम्बल में भी ठण्ड लगती है तब लोग रजाइयाँ (लिहाफ) ओढ़कर सोते हैं। बेचारे बेघर लोग जाड़े में काँपते-ठिठुरते हैं। सवेरे काफी ठण्ड पडती तब चाय पीकर ही चैन पड़ता है। गरम पेय (चाय, दूध, काफी आदि) अच्छे लगते हैं। सर्दी में भूख भी बढ़ जाती है और खाया-पीया पच जाता है।

पुरुष गरम सूट पहनकर काम पर जाते हैं। किसान लोग पुआल, उपले, लकड़ी आदि जलाकर आग तापते हैं, तब उनकी ठण्ड दूर होती है। अधिक सर्दी में दाँत बजने लगते हैं। हाथ सेककर शरीर में गर्माइश आती है। धनी लोग घरों और दफ्तरों में बिजली के हीटर जलाते हैं।

लड़के-लड़कियाँ खेल के मैदान में घण्टों खेलते रहते हैं। फिर भी नहीं थकते। इन दिनों बादाम, पिस्ता, काजू, तिलगोजे, किशमिश, खजूर, मूंगफली आदि खाना अच्छा लगता है। शीतकाल में पढ़ाई खूब होती है। अत: विद्याथीं इन्हीं दिनों पढ़ाई की सारी कसर पूरी कर लेते हैं।

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