Tuesday, 1 September 2020

प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध Plastic Pollution essay in Hindi

Plastic Pollution essay in HindiPlastic (Polythene) Pollution essay in Hindi पॉलिथीन पेट्रोलियम और प्रकृतिक गैसों से बनाया जाता है पॉलिथीन हमारे पर्यावरण और हमारे लिए बहुत नुकसानदायक होता है क्योंकि इसे विघटित करना बहुत मुश्किल है, यदि इसे जलाकर खत्म करने की कोशिश की जाए तो इससे हवा में कार्बनडाईऑक्सइड की मात्रा बढ़ जाती है, यदि इसे धरती पर बिना जलाए ही छोड़ दिया जाए तो इसे गलने में सैंकड़ों वर्ष का समय लग जाएगा।
आज पॉलिथीन से बनी चीज़ों का इस्तेमाल हमारी रोज़ाना की जिंदगी का हिस्सा बन गया है इसका प्रयोग बाजार से लेकर रसोई तक किया जा रहा है ये तो सत्य है के पॉलिथीन गरीब वर्ग के लिए सबसे सुविधाजनक और सस्ता रहता है कित्नु दूसरी तरफ देखा जाए ये मानव जाति और पर्यावरण के लिए खतरा साबित हो रहा है।

पॉलिथीन मतलब के प्लास्टिक से बनी चीज़ें ये कभी नहीं सड़ता चाहे इसे जमीन के अंदर क्यों न दफन कर दिया जाए ये जैसे का तैसा ही रहेगा। पॉलिथीन प्रकृति रूप से कभी नहीं सड़ता जलाये बिना भी पॉलिथीन लगातार खतरनाक गैसों का उत्सर्जन कर हवा को दूषित कर देता है, यही कारण है के आम आदमी की तुलना में पॉलिथीन फैक्टरी में काम करने वालों को कैंसर होने का खतरा 80  फीसदी ज्यादा होता है। पॉलिथीन से बनी गैसें जानलेवा तो होती ही हैं साथ ही साथ ये ओजोन परत को भी नुक्सान पहुंचाती हैं जिस कारण सूर्य की खतरनाक गैसें धरती तक पहुंच रहीं हैं। पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुके ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण पॉलिथीन भी है।

पॉलिथीन हमारी नदी , नाले और समुन्द्रों को ज़हरीला बनाता जा रहा है। भारत की पवित्र नदी गंगा और यमुना के किनारे कई जगहों पर पॉलिथीन की परत चढ़ गयी है। इनके जल में बड़ी संख्या में फेंके गए पॉलिथीन जल को लगातार प्रदूषित करते जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रकृति का वष्पीकरण भी रुक जाता है यानि के पानी भाफ़ बनकर उड़ना बंद हो जाता है जिससे बादल नहीं बनते और यदि बादल नहीं बनेंगे तो बारिश नहीं होगी।

पॉलिथीन को सड़ने में हज़ार वर्षों का समय लग जाता है, उपयोग के बाद इसी पॉलिथीन को यहां -वहां फेंक दिया जाता है यह जमीन की उपजाऊ शक्ति को कम कर देता है। एक अध्ययन के अनुसार अगर खेतों में पॉलिथीन को डंप किया जाये तो यह एक साल के अंदर जमीन की उपजाऊ शक्ति को कम कर देता है यानि के जमीन पूरी तरह बंजर हो जाती है। पहाड़ी इलाकों में  भूस्खलन की सबसे बड़ी वजय पॉलिथीन ही है जमीन में डंप होकर पॉलिथीन मिट्टी को भुरभुरी बना देता है, जिससे जमीन धसने लगती है, लैंड फिलिंग में पॉलिथीन का उपयोग होने के कारण समूचा भवन ही धस जाने के उदाहरण मिलते हैं।

पॉलिथीन पेड़ पौधों के लिए घातक है जमीन पर पड़ा पॉलिथीन पेड़ -पौधों को पोषक तत्व लेने से रोकता है जिससे पौधों को जरूरी आहार नहीं मिल पाता और कुछ दिनों के पश्चात पौधा सूखने लगता है। एक अध्ययन के अनुसार 20 किलोग्राम पॉलिथीन केवल छे महीने से भी कम समय में 50 वर्ष पुराने बरगद के पेड़ को भी नाश करने की ताकत रखता है।

पॉलिथीन में खाद्द समग्रियाँ भरकर फ्रिज  में रखना काफी खतरनाक होता है क्योंकि इससे लगातार पैदा होने वाली गैसें फ्रिज में रखी अन्य खाद्द समग्रियों को भी नुकसान पहुंचाती हैं और इन पदार्थों को खाने से दस्त , उल्टी और पेट में दर्द की शिकायत हो सकती है। काला और गुलाबी रंग के पॉलिथीन का प्रयोग आम पॉलिथीन की तुलना में 2 गुना ज्यादा खतरनाक है। काला और गुलाबी पॉलिथीन इस्तेमाल कर फेंके गए पॉलिथीन बैग्स को रीसायकल कर बनाया जाता है।

पॉलिथीन पर पाबंदी से प्रकृति को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है इसका इस्तेमाल बंद होने से रोजगार के नए द्वारा खुलेंगे एक और यहाँ चंद  मजदूर और कुछ मशीने मिलकर पॉलिथीन तैयार कर देती हैं वहीँ पॉलिथीन का विकल्प तैयार करने में बहुत सारे लोगों को आवश्यकता पड़ेगी, स्वरोजगार शुरू करने के अवसर भी लोगों को मिलेंगे पॉलिथीन पर रोक लगाने से घर में बैठकर तैयार किये जाने वाले साधारण से कागज के लिफ़ाफे तक को बड़ा बाजार दिया जा सकता है।

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