Thursday, 3 September 2020

Poem on Childhood in Hindi | बचपन पर कविता

Poem on Childhood in Hindi | बचपन पर कविता

poem on childhood in Hindi

देखते ही देखते बचपन गुजर गया
गिल्ली डंडे से फिसल कर
पब्जी में उतर गया कभी कहा जाता था
किताबों में मिलना है ज्ञान
आज गूगल बाबा पर निर्भर है इन्सान
कभी किताबें पढ़ -पढ़ सो जाता था
आज इन्टरनेट पर पढ़ते पढ़ते
सूरज निकल आता है
कभी चिट्ठियों का रहता था महीनों इंतज़ार
आज एक मैसेज की बात पर
दोस्त कहता है यार busy हूं
कभी घर के आंगन में बैठकर
सुनी जाती थी कहानी
आज दुनिया है youtube की दीवानी
कभी दीवार में लगे झरोखे से
बैठकर हो जाती थी भरोसे की बातें
आज whatsapp ने है सारे रिश्ते बांधे
बेशक यह जमाना भारी है
उस जमाने पर
मगर आज भी दिल धड़कता है
बचपन की यारी पर
कल्पना - पुरवा , उन्नाव यूपी

अन्य कविताएं - 

SHARE THIS

Author:

EssayOnline.in - इस ब्लॉग में हिंदी निबंध सरल शब्दों में प्रकाशित किये गए हैं और किये जांयेंगे इसके इलावा आप हिंदी में कविताएं ,कहानियां पढ़ सकते हैं

0 comments: