Tuesday, 1 September 2020

दशहरा पर कविता - Poem on Dussehra in Hindi

दशहरा पर कविता - Poem on Dussehra in Hindi

Poem on Dussehra in Hindi


सत्य की हुई हमेशा जीत
बुराई की होती सदा हार
कहता दशहरा का त्योहार
करना तुम सब की भुलाई
रावण था दंभी -अभिमानी
छल -बल से था उसका नाता
तब राम ने सिर उसका काटा
अपनी ही करनी से उसने
सोने की लंका जलवाई
मन में न पालो कोई बुराई
किया है जिसने अभिमान
नहीं रहा कभी उसका मान
अगर माने यह सब इंसान
मिट जाए सबका अंधकार।
हर दिन हो दिवाली - होली
खुशियों की बनेगी रंगोली
आप सबको हैप्पी दशहरा। - पवन कुमार
दशहरा पर छोटा निबंध

दशहरा का पर्व - Poem on Dussehra in Hindi

सच्चाई की हुई विजय
बुराई की हुई पराजय
दशहरा का पावन त्योहार
लाता है हर घर हर्षौल्लास
रामजी ने रावण को हराया
धर्म का साथ उन्होंने निभाया
काटा रावण के दस मस्तकों को
पराजित कर दिया अधर्म को
दशहरा का पर्व हमें है
सिखलाता करें हम
सदा भलाई।
रागिनी कुमारी
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पावन पर्व दशहरा का - Dussehra Poem in Hindi

पावन पर्व दशहरे का
अनोखा है नजारा मेरे
शहर में
भव्य पूजा पंडालों में सजा है
भक्ति भाव की सरिता बही है
देवी दुर्गा के विविध रूपों की
प्रस्तुती है नूतन झांकी के रूप में
ऊंचे झूले रंगीन गुब्बारे भी हैं
चाट , मिठाई , नमकीन , पकौड़े भी हैं
रोमांच बढाते हैं जहाँ के मेले
रावण और मेघनाद के पुतले
गाँव में होती हैं झांकियां
नगर में गरबा और डांडिया
पौराणिक नाटक और रामलीला
जीवंत बनाते हमारी लोक कला।
-अंबुज नयन
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