Wednesday, 2 September 2020

Rabbit and Fox Story in Hindi सच्चा दोस्त हिंदी कहानी

Rabbit and Fox Story in Hindi  - किसी जंगल में एक बहुत पुराना आम का पेड़ था। उस पेड़ के अंदर ख़रगोश और गिलहरी साथ रहते थे। दोनों सुबह खाने के लिए बाहर जाते और शाम को उसी पेड़ पर वापिस लौट आते। एक दिन अचानक मौसम बहुत ख़राब हो गया तेज़ पानी बरसने लगा और लगातार कई दिनों तक पानी बरसता रहा जिसकी वजय से जंगल के अन्य जानवर भी मुसीबत में पड़ गए।

Rabbit and Fox Story in Hindi


वहां एक लूमड़ी अकेली रहती थी उसका कोई नहीं था लूमड़ी बहुत भूखी प्यासी थी वह उसी पेड़ के पास आकर बैठ गयी और रोने लगी। ख़रगोश को रोने की आवाज़ सुनाई दी बाहर आकर देखा तो लूमड़ी रो रही थी। खरगोश के पूछा "बहन क्या बात है और कौन हो तुम ? लोमड़ी रोते हुए बोली भाई इतने बड़े जंगल में मेरा कोई नहीं है और में कई दिनों से भूखी प्यासी भी हूं।

ख़रगोश बोला 'बहन चिंता मत करो तुम मेरे साथ चलो में तुम्हे खाना खिलाता हूं 'ये लो भोजन। लोमड़ी ने पेटभर खाना खाया और अपने घर वापिस लौट गयी। कुछ दिन बीत जाने के बाद ख़रगोश और गिलहरी खाने के लिए गए हुए थे उनको वापिस आने में देर हो गयी। उसी जंगल में चूहा और चुहिया भी रहते थे उनके छोटे छोटे बच्चे भी थे। वे दोनों अपने बच्चों को खिलाने के लिए कुछ ढूंढने निकले। धीरे धीरे दोनों उसी आम के पेड़ के नीचे आकर रुक गए उन्हें उस पेड़ पर खाने के लिए भोजन दिखा दोनों ने आपस में बात की के यहां तो कोई नहीं है क्यों न यह खाना हम अपने घर ले चलें आखिर दोनों ने समान को लेजाने की पूरी तैयारी कर ली।

तभी अचानक लूमड़ी वहां पर घुमते घूमते वहां पहुंच गयी उसको आवाज़ सुनाई दी चलो आज पेटभर खाएंगे ओह जहां कोई नहीं है लोमड़ी समझ गयी के दोनों मित्र बाहर गए हुए हैं मुझे उनके सामान की रक्षा करनी चाहिए तभी लोमड़ी बोली बिल्ली आई भागो बिल्ली आई भागो बिल्ली के आने की आवाज़ सुनकर चूहा और चुहिया वहां से भाग गए। उसी वक्त ख़रगोश और गिलहरी भी वापिस आ गए वहां की हालत देखकर दोनों समझ गए और लोमड़ी से बोले बहन आपका धन्यवाद आपने हमारे भोजन की रक्षा की।

लोमड़ी बोली ख़रगोश भाई यह तो मेरा कर्तव्य था में तो पहले से ही आपकी एहसानमंद हूं उस दिन आपने मुझे खाना खिलाया था तभी आज में जिन्दा हूं ,लोमड़ी की इसी बात दोनों मित्र खुश होकर बोले आज तुम भी मेरे साथ रहोगी , नेकी का फल सदैव अच्छा ही होता है और फिर तीनों एक साथ रहने लगे। - संतोष चतुर्वेदी 

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