Tuesday, 1 September 2020

रक्षा बंधन पर निबंध : Short Essay on Raksha Bandhan in Hindi

Short Essay on Raksha Bandhan in Hindi

भारत को त्योहारों का गुलदस्ता कहा जाता है यहां हर वर्ष अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं जिनका अपना अपना -अपना महत्व है वहीँ रक्षा बंधन का त्योहार भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक गिना जाता है। इसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। यह त्योहार भाई -बहन के प्यार का प्रतीक है।
Short Essay on Raksha Bandhan in Hindiइस त्यौहार का सबंध कई कथाओं से जुड़ा है महाभारत की कथा के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण जी ने शिशुपाल का बध अपने चक्र से किया और शिशुपाल का सिर कटने के पश्चात चक्र वापिस श्री कृष्ण जी के पास आया तो इससे उनकी ऊँगली कट गयी उंगली से रक्त बहने लगा यह देखकर द्रोपदी ने अपनी साड़ी के पल्ले से एक टुकड़ा फाड़ कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया जिससे ख़ून बहना बंद हो गया इसके बदले कृष्ण जी ने द्रोपदी को हर मुश्किल में उनकी रक्षा करने का वचन दिया।

भरी सभा में जब द्रोपदी को नग्न करने की कोशिश की गयी तो उस समय भगवान कृष्ण द्वारा उस साड़ी के टुकड़े बदले द्रोपदी की लाज रखी। दूसरी कथा के मुताबिक रानी कर्मवती ने शक्तिशाली शासक बहादुर शाह जैसे राजा से रक्षा के लिए हुमायूँ को राखी भेजी थी हुमायूँ ने कर्मवती की राखी को स्वीकार करते हुए उसकी रक्षा करने का वचन दिया था।

रक्षा बंधन के कुछ दिनों पहले ही बाज़ारों में राखियां दिखाई देने लगती हैं और रक्षा बंधन का त्योहार श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। रक्षा बंधन के शुभ दिन पर बहनें अपने भाईओं की कलाई पर राखी बांधती हैं और अपने भाईओं के प्रति प्रेम ज़ाहिर करती हैं भाई भी राखी बंधवाने के बदले अपनी बहन को बदले में कई तरह के उपहार और रक्षा करने का वचन देता है।
यह पवित्र त्योहार भाई –बहन के पवित्र सबंध का प्रतीक है इस दिन बहने अपने भाई की सुख –स्मुर्द्धि की कामना करती हैं
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Short essay on Raksha Bandhan - 250 words

रक्षाबंधन का त्यौहार सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है इसे भाई और बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक बताया जाता है लेकिन रक्षाबंधन केवल भाई बहन का पर्व नहीं है। पहली बार रक्षा सूत्र बांधने का वर्णन देव और दानवों के युद्ध के समय मिलता है जब दानवी  शक्ति हावी होने लगी तो इंद्र की पत्नी शचि ने अपने पति की कलाई पर अभिमंत्रित धागों को बांधा था संजोग से वह सावन मास की पूर्णिमा तिथि थी दूसरी कहानी भगवान विष्णु और दानवीर राजा बलि से जुड़ी है 100 यज्ञ को पूरा कर लेने पर राजा बलि को स्वर्ग की प्राप्ति की इच्छा हुई तब भगवान विष्णु ने बामण का अवतार लिया और मंत्र से युक्त धागों से राजा बलि को बांधा मंत्र जो पढ़ा जाता है वह है – येन  बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबल तेन त्वाम्पी बध्नामि रक्षे मा चल मा चल जानी जिस रक्षासूत्र से राजा बलि को बांधा गया था उसी से मैं तुम्हें बांधता हूं हे राखी तुम अडिग रहना राखी का वास्तविक अर्थ है किसी को अपनी रक्षा के लिए बांध लेना यही कारण है रानी कर्णावती ने हुमायूं के समक्ष रक्षासूत्र भेजकर रक्षा की गुहार लगाई थी । आजादी के दौरान राष्ट्रीय एकता के लिए राखी का उपयोग किया गया वर्ष 1950 में बंगाल विभाजन के खिलाफ पूरे देश में एकता प्रदर्शित करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने एक दूसरे को राखी बांधी थी।

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